शरद पूर्णिमा की रात क्यों नहीं सोना चाहिए?
शरद पूर्णिमा की रात क्यों नहीं सोना चाहिए?
कहते हैं शरद पूर्णिमा की रात चांद अपनी पूरी ताकत से चमकता है और उसकी रोशनी अमृत जैसी होती है
कहते हैं शरद पूर्णिमा की रात चांद अपनी पूरी ताकत से चमकता है और उसकी रोशनी अमृत जैसी होती है
इस रात खीर बनाकर आसमान के नीचे रखी जाती है, ताकि उसमें चांदनी का अमृत उतर जाए
इस रात खीर बनाकर आसमान के नीचे रखी जाती है, ताकि उसमें चांदनी का अमृत उतर जाए
लोग रातभर जागते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं, क्योंकि माना जाता है – ये रात सोने के लिए नहीं, जागने के लिए है
लोग रातभर जागते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं, क्योंकि माना जाता है – ये रात सोने के लिए नहीं, जागने के लिए है
मान्यता है कि जो इस रात जागता है,उसके घर में माँ लक्ष्मी का वास होता है
मान्यता है कि जो इस रात जागता है,उसके घर में माँ लक्ष्मी का वास होता है
चांदनी में बैठना, भजन सुनना और अमृत खीर खाना –मन को सुकून और शरीर को एनर्जी देता है
चांदनी में बैठना, भजन सुनना और अमृत खीर खाना –मन को सुकून और शरीर को एनर्जी देता है
तो इस शरद पूर्णिमा पर खीर बनाइए, चांदनी में रखिए,और रातभर भक्ति में डूब जाइए —कहते हैं, आज की रात खुद लक्ष्मी धरती पर आती है
तो इस शरद पूर्णिमा पर खीर बनाइए, चांदनी में रखिए,और रातभर भक्ति में डूब जाइए —कहते हैं, आज की रात खुद लक्ष्मी धरती पर आती है