जिसकी कृपा से मिलता है संतान सुख… कौन है वो छठी मैया?

Chhathi Maiya: भारतीय संस्कृति में छठ महापर्व का विशेष महत्व है. छठ को महापर्व कहा जाता है क्योंकि केवल पूजा अर्चना नहीं, बल्कि कठोर तपस्या है. बिहार, झारखंड और पूर्वांचल में यह पर्व अपार श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. आस्था और समर्पण का यह अनूठा प्रतीक, लेकिन क्या आप जानते हैं कि छठी मैया कौन हैं?

कौन है छठी मैया?

मार्कण्डेय पुराण में एक अद्भुत कथा का वर्णन मिलता है. जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की, तो उन्होंने सर्वप्रथम प्रकृति का निर्माण किया. देवी प्रकृति ने अपने आप को छह दिव्य रूपों में विभाजित कर लिया. इन छह अंशों में से छठे अंश को ही छठी मैया या देवी षष्ठी के नाम से जाना जाता है. इस कारण उन्हें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री भी कहा जाता है.

भगवान शिव से अनोखा नाता

धार्मिक ग्रंथों में देवी देवसेना (छठी मैया) का विवाह भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय से बताया गया है. इस संबंध से वे भोलेनाथ की पुत्रवधू हुई. साथ ही, कई पौराणिक संदर्भो में छठी मैया को सूर्य देव की बहन भी माना जाता है, जो छठ पर्व में सूर्य पूजा की महत्ता को और भी गहरा बना देता है.

क्यों है पर्व इतना खास

छठ पर्व में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है. डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर जीवनदायी ऊर्जा के स्रोत की वंदना की जाती हैं. यह पर्व सिखाता है कि प्रकृति के बिना जीवन असंभव है और हमें उसके प्रति सदैव आभारी रहना चाहिए. छठी मैया की कृपा से न केवल संतान सुख मिलता है, बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है.यही कारण है कि यह महापर्व पीढ़ियों से अटूट आस्था के साथ मनाया जा रहा है.

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