Bihar land registration : बिहार सरकार ने भूमि निबंधन (रजिस्ट्री) व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आसान और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ पहल के तहत डोरस्टेप प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सेवा की शुरुआत की है. इस सुविधा के माध्यम से 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र नागरिक अब अपने घर बैठे ही जमीन, फ्लैट या प्लॉट की रजिस्ट्री करा सकेंगे. इस पहल का उद्देश्य बुजुर्गों को रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और वर्षों से सक्रिय दलाल तंत्र पर अंकुश लगाना है.
ऑनलाइन स्लॉट बुक कर घर पहुंचेगी मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट
नई व्यवस्था का लाभ लेने के लिए पात्र वरिष्ठ नागरिकों को सबसे पहले आधिकारिक ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होगा. आयु सत्यापन के बाद सरकार की मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट निर्धारित समय पर आवेदक के घर पहुंचेगी. यह यूनिट इंटरनेट से लैस लैपटॉप, बायोमेट्रिक स्कैनर, वेबकैम और डिजिटल सिग्नेचर पैड जैसी आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित होगी. अधिकारी मौके पर ही दस्तावेजों का सत्यापन, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया पूरी करेंगे. रजिस्ट्री पूर्ण होते ही डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित पीडीएफ के रूप में आवेदक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेज दिया जाएगा.
दलालों की भूमिका होगी समाप्त
सरकार का कहना है कि यह नई डिजिटल व्यवस्था उन सभी चरणों को समाप्त कर देगी, जहां अब तक दलालों का दखल रहता था. पहले बुजुर्गों और महिलाओं को रजिस्ट्री कार्यालयों में लंबी कतारों, कागजी प्रक्रिया और बिचौलियों की मनमानी का सामना करना पड़ता था. अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में दलाल अनधिकृत शुल्क वसूलते थे, दस्तावेजों में अनावश्यक आपत्तियां लगवाते थे और संपत्ति के मूल्यांकन में हेरफेर कर स्टांप शुल्क की चोरी तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते थे. नई व्यवस्था में शुल्क, ई-स्टांप और ई-चालान की गणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिससे अतिरिक्त वसूली की गुंजाइश नहीं रहेगी.
फर्जीवाड़े पर भी लगेगी रोक
डोरस्टेप रजिस्ट्रेशन सेवा में रियल-टाइम बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा. इससे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा फर्जी पहचान या अवैध पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए संपत्ति की रजिस्ट्री कराने जैसी धोखाधड़ी की संभावनाएं काफी हद तक समाप्त हो जाएंगी.
फिलहाल 10 कार्यालयों में सेवा, जल्द पूरे बिहार में विस्तार
यह सुविधा फिलहाल पटना और हाजीपुर सहित 10 निबंधन कार्यालयों में शुरू की गई है. सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे बिहार में लागू करेगी. राज्य के सभी 38 जिलों में मौजूद 137 पूर्णतः डिजिटल सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पहले से ही भूमि अभिलेख डेटाबेस से जुड़े हुए हैं, जिससे इस सेवा के विस्तार में आसानी होगी. सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक आधारित यह पहल न केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाएगी, बल्कि भूमि निबंधन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, भ्रष्टाचार कम करने और राजस्व संग्रह को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.