गीत संगीत के बिना अधूरा है बिहार का महापर्व, जानिए छठ में सुने जाने वाले टॉप 5 गीत

Chhath Mahaparva: छठ का चार दिवसीय महापर्व शुरू हो गया है। यह पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है, जो पूरे चार दिनों तक अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान घर से लेकर घाट तक हर जगह भक्ति का माहौल रहता है, और इस पर्व में भक्ति और मिठास घोलने का काम करती है पारंपरिक छठ गीत। ये गीत न केवल धार्मिक भावनाओं को प्रकट करते हैं बल्कि इस पर्व की सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवित रखते हैं। जानते हैं छठ पूजा के साथ कुछ सबसे लोकप्रिय और मधुर गीतों के बारे में जिन्हें सुनकर आपका मन भक्ति भाव में सराबोर हो जाएगा।

छठ पूजा के गाने

1. कांच ही बांस के बहंगिया

यह छठ पूजा का सबसे लोकप्रिय और पारंपरिक गीत है। कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए की मधुर धुन हर व्रती के मन में छठी मैया के प्रति आघात श्रद्धा जगा देती है।

2. जोड़े जोड़े फलवा सूरज देव

सूर्य देव को अर्घ्य देते समय यह गीत गया जाता है। इसमें सूप से जोड़े के फल सजाकर सूर्य देव को अर्पित करने की बात कही गई है। यह गीत अर्घ्य के पवित्र क्षण को और भी भावपूर्ण बना देती है।

3. छठी मैया के ऊंची अटारिया

इस गीत में छठी मैया के घर की ऊंची अटारी का वर्णन किया गया है, जहां से वह अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती है।

4. आदित मनैला हो दिनानाथ

यह गीत सूर्य देव की महिमा का वर्णन करता है, और उन्हें दिनों के नाथ कहकर संबोधित करता है। लोग इस गीत के माध्यम से सूर्य देव से आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।

5. पहिले पहिले हम कईनी

यह गीत पहली बार छठ व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है, इसमें पहली बार व्रत रखने की भावनाओं को दर्शाया गया है।

छठ पूजा के गीत भोजपुरी और मैथिली भाषा में होते हैं। जो बिहार और और पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान है, इन गीतों की धुन अत्यंत मधुर और सरल होती है, जिससे कोई भी आसानी से गुनगुना सकता है। यह गीत पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है, छठ पूजा की परंपरा का अभिन्न हिस्सा भी है। शारदा सिन्हा, मालिनी अवस्थी, अनुराधा पौडवाल और कई अन्य कलाकारों ने छठ गीतों को नया रूप दिया है, उनकी मधुर आवाज में गाए गए यह गीत लाखों करोड़ों बार सुने जाते हैं।

छठ पूजा के गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि आस्था विश्वास और भक्ति की अभिव्यक्ति है। इन गीतों को सुनते ही व्रती महिलाओं का मन भक्ति में इतना डूब जाता है, कि 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत का भी कष्ट महसूस नहीं होता।

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