272 रिटायर्ड जजों-अफसरों का राहुल गांधी के खिलाफ आरोप पत्र…वोट-चोरी को लेकर चुनाव आयोग पर हमलों को बताया निराधार

Rahul Gandhi : पूर्व न्यायाधीशों, सेवानिवृत्त सिविल सेवकों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों सहित 272 नागरिकों के एक समूह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कड़ी आलोचना की है. समूह ने आरोप लगाया है कि गांधी लगातार चुनावी पराजयों से उपजी कुंठा में चुनाव आयोग (ECI) की विश्वसनीयता पर हमला कर रहे हैं.

संयुक्त बयान में कड़ी भाषा

जारी किए गए संयुक्त बयान में हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि विपक्ष के नेता बार-बार वोट चोरी जैसे आरोप लगाकर आयोग को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं और अविश्वसनीय रूप से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. बयान के अनुसार, गांधी ने यहां तक कि चुनाव आयोग के अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पकड़ने की धमकी भी दी, लेकिन अब तक उन्होंने कोई औपचारिक शिकायत या शपथ-पत्र दाखिल नहीं किया है. समूह का कहना है कि इससे गांधी बिना किसी जवाबदेही के सार्वजनिक मंचों पर आरोप लगाते रहे हैं. इस बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल, पूर्व न्यायाधीश एस.एन. ढींगरा, हेमंत गुप्ता और राजीव लोचन, पूर्व रॉ प्रमुख संजीव त्रिपाठी, पूर्व एनआईए प्रमुख वाई.सी. मोदी सहित कई नाम शामिल हैं. बयान में कहा गया है कि गांधी का व्यवहार रचनात्मक राजनीति की बजाय निराशा का संकेत है.

दुसरे नेताओं और संगठनों पर भी आरोप

समूह ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी, अन्य राजनीतिक दलों के नेता, वामपंथी एनजीओ, कुछ वैचारिक रूप से प्रेरित शिक्षाविद और ध्यान आकर्षित करने की चाह रखने वाले लोग भी गांधी के सुर में सुर मिला रहे हैं. बयान में उल्लेख है कि इन लोगों ने चुनाव आयोग को “बीजेपी की बी-टीम” तक करार दे दिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए.

ECI की प्रक्रिया को बताया पारदर्शी

बयान में दलील दी गई कि ऐसी बयानबाज़ी तथ्यों पर टिक नहीं पाती. समूह के अनुसार, चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया की कार्यप्रणाली सार्वजनिक की है, न्यायालय-निगरानी वाले सत्यापन की अनुमति दी है, पात्र मतदाताओं को सूची में जोड़ा है और अपात्र नाम हटाए हैं. इसलिए, आयोग पर लगाए जा रहे आरोप असत्य और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होते हैं. हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि जब नेता जनता से कटने लगते हैं, तो वे अपनी राजनीतिक विफलताओं को संस्थाओं पर आरोप लगाकर छिपाने की कोशिश करते हैं. उनके अनुसार, थिएट्रिक्स विश्लेषण की जगह ले लेता है, और जनसेवा के स्थान पर सार्वजनिक तमाशा हावी हो जाता है. बयान में गांधी की सेना, न्यायपालिका और संसदीय संस्थाओं पर की गई पूर्व टिप्पणियों का भी संदर्भ दिया गया.

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