Indian law for MMS : UN की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में महिलाओं के खिलाफ अपराध मे काफी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. रिपोर्ट में भारत की स्थिति भी अच्छी नही है. हालांकि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भारत में सख्त कानून है लेकिन इसकी जानकारी नहीं होने के चलते कभी कभी पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता. भारत के संविधान में महिलाओं के सम्मान, गरिमा और निजता की रक्षा को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से लागू की गई भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 75, 76 और 77 में यौन अपराधों को लेकर बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं. ये धाराएं महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन उत्पीड़न, निर्वस्त्र करने के प्रयास और ताक-झांक या निजता भंग करने जैसे अपराधों के लिए कठोर सजा का प्रावधान करती हैं.
यौन उत्पीड़न पर सख्त कार्रवाई
धारा 75 के तहत किसी महिला का यौन उत्पीड़न एक गंभीर अपराध माना गया है. इसमें अवांछित (unwanted) यौन प्रस्ताव, जबरन शारीरिक संपर्क, इच्छा के विरुद्ध अश्लील टिप्पणियां, अश्लील सामग्री दिखाने के लिए दबाव बनाना और यौन एहसान की मांग करना शामिल हैं. इसके लिए दोषी पाए जाने पर आरोपी को कठोर कारावास और जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. यह धारा महिलाओं को कार्यस्थल, सार्वजनिक स्थान और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा देने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
महिला को निर्वस्त्र करने पर 7 साल तक की जेल
धारा 76 के तहत यदि कोई आरोपी किसी महिला को निर्वस्त्र करता है, या उसे निर्वस्त्र करने के इरादे से उसपर हमला करता है, या इसके लिए आपराधिक बल का प्रयोग करता है तो इसे गंभीर संज्ञेय अपराध माना जाएगा. जिसके लिए न्यूनतम 3 साल से लेकर अधिकतम 7 साल तक की कठोर कैद और साथ में भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है यह धारा महिलाओं की गरिमा और आत्मसम्मान पर हमले को सीधे अपराध की श्रेणी में रखती है.
ताक-झांक (Voyeurism) बना दंडनीय अपराध
धारा 77 के तहत किसी महिला की निजी गतिविधियों को उसकी अनुमति के बिना देखना, रिकॉर्ड करना या वायरल करना अपराध है. इसमें बाथरूम, कपड़े बदलने के कमरे या निजी स्थानों पर चोरी से वीडियो बनाना, मोबाइल या कैमरे से तस्वीर लेना, ऐसे वीडियो या फोटो को सोशल मीडिया पर फैलाना शामिल हैं. ऐसे मामलों में पहली बार दोषी पाए जाने पर 1 से 3 साल तक की कैद और जुर्माना तथा दोबारा अपराध पर 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माना मिलता है. यह प्रावधान डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रहे प्राइवेसी उल्लंघन और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
क्या हैं विशेषज्ञों की राय
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय न्याय संहिता की ये तीनों धाराएं महिलाओं को कानूनी सुरक्षा का मजबूत कवच देती हैं, अपराधियों में कानून का भय पैदा करती हैं तथा डिजिटल अपराध और सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न पर प्रभावी रोक लगाने में मददगार हैं. महिलाओं के अघिकार और उसके हितों के रझा के लिए बनाए गए संगठन भी इन प्रावधानों का स्वागत करती हैं. इस तरह के कानून से पीड़ितों को न्याय मिलने की संभावना पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है.