दो दोस्तों की मुलाकात पर दुनिया की नजर… 23 वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन से अमेरिका को किस बात का डर ?

India America Diplomacy :भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं और समय की हर कसौटी पर खरे उतरे हैं। इसी ऐतिहासिक दोस्ती को एक बार फिर नई मजबूती देने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आज भारत पहुंचे हैं। पुतिन के इस दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच कई अहम समझौतों और रणनीतिक मसलों पर बातचीत होने की संभावना है। इनमें मुख्य रूप से रक्षा सहयोग ,ऊर्जा क्षेत्र, व्यापार और निवेश और तकनीकी सहयोग पर चर्चा होगी.पुतिन के इस दौरे को लेकर न सिर्फ भारत और रूस में, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। खास बात यह है कि इस यात्रा को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिकी मीडिया में देखने को मिल रही है।

अमेरिका में क्यों मची है हलचल?

पुतिन के भारत दौरे को लेकर अमेरिका के बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट्स और विश्लेषण प्रकाशित किए हैं। CNN से लेकर Washington Post तक ने भारत, रूस और अमेरिका के बीच हालिया कूटनीतिक घटनाक्रमों पर विस्तार से लेख लिखे हैं। अमेरिकी मीडिया में यह सवाल उठाया जा रहा है कि एक तरफ भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग लगातार बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह रूस के साथ भी अपने पारंपरिक संबंधों को और मजबूत कर रहा है। अमेरिकी अखबारों में यह चर्चा भी तेज है कि यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत का रूस के साथ इस स्तर का सहयोग अमेरिका के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकता है।

अमेरिका से डील, उधर पुतिन का स्वागत

पुतिन के भारत दौरे को ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत और अमेरिका के रिश्ते भी नई ऊंचाई पर हैं। रक्षा सौदों, इंडो-पैसिफिक रणनीति और क्वाड जैसे मंचों पर भारत-अमेरिका की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। ऐसे में अमेरिका के रणनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि भारत कैसे एक साथ अमेरिका और रूस – दोनों के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी मीडिया इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति से जोड़कर देख रहा है, जिसके तहत भारत किसी एक गुट में बंधने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले करता है।

वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन की यह यात्रा सिर्फ भारत-रूस संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए भी बेहद अहम है। यह दौरा यह साफ संकेत देता है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक ऐसा वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है, जिसकी रणनीति और फैसलों पर अमेरिका, रूस और यूरोप  सभी की नजर है। कुल मिलाकर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देगा, बल्कि अमेरिका, रूस और भारत के त्रिकोणीय समीकरणों को भी नए सिरे से परिभाषित करता नजर आएगा। यही वजह है कि यह दौरा आज पूरी दुनिया के मीडिया और रणनीतिक विश्लेषकों के केंद्र में बना हुआ है।

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