MNREGA : केंद्र सरकार देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले गारंटीड रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही इस योजना का नाम बदलने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस संबंध में हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रारंभिक स्तर पर चर्चा हुई है। हालांकि, अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
क्यों जरूरी माना जा रहा है बदलाव
सरकार का मानना है कि महंगाई, ग्रामीण बेरोजगारी और अस्थिर कृषि आय के बीच मनरेगा की भूमिका को और मजबूत करने की जरूरत है। कई राज्यों की ओर से लंबे समय से मांग की जा रही है कि 100 दिनों की सीमा को बढ़ाया जाए, क्योंकि मौजूदा प्रावधान ग्रामीण परिवारों की सालभर की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 वित्त वर्ष में औसतन एक परिवार को केवल 50 दिन के आसपास ही रोजगार मिल पाया, जबकि कानून में 100 दिन की गारंटी है। बहुत कम परिवार ऐसे रहे, जिन्हें पूरे 100 दिन का काम मिला।
नाम बदलने की भी तैयारी
सूत्रों के अनुसार, सरकार मनरेगा का नाम बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम रखने पर भी विचार कर रही है। इससे पहले यह योजना 2005 में नरेगा (NREGA) के नाम से शुरू हुई थी और 2009 में इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी नरेगा किया गया था। यदि नाम और रोजगार दिनों में बदलाव किया जाता है, तो इसके लिए कानून में संशोधन करना अनिवार्य होगा, क्योंकि मौजूदा अधिनियम में न्यूनतम 100 दिन के रोजगार का प्रावधान दर्ज है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
कई राज्य पहले से ही अपने संसाधनों से मनरेगा के तहत 100 दिनों से अधिक रोजगार दे रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार का यह प्रस्ताव राष्ट्रीय स्तर पर एक समान व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। विपक्षी दल लंबे समय से इसके बजट, मजदूरी दर और रोजगार के दिनों को बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। वहीं, सरकार का तर्क है कि योजना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जरूरत-आधारित बनाने पर फोकस किया जा रहा है।
आगे क्या होगा
सूत्रों का कहना है कि यदि सरकार इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाती है, तो इसे संसद में विधेयक के रूप में लाया जाएगा। उसके बाद ही 125 दिन का रोजगार और नया नाम आधिकारिक रूप से लागू हो पाएगा। फिलहाल, यह प्रस्ताव विचाराधीन है, लेकिन अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह मनरेगा के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।