2 साल बाद बीजेपी को मिला नया कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष…जेपी नड्डा की जगह बिहार के इस नेता को जिम्मेदारी

BJP National President : भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लंबे इंतजार के बाद आखिरकार संगठन में बड़ा फैसला लेते हुए रविवार, 14 दिसंबर को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया। पार्टी ने बिहार के बांकीपुर से पांच बार के विधायक और बिहार सरकार में मंत्री नितिन नवीन को यह जिम्मेदारी सौंपी है। वह मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जगह कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर काम संभालेंगे।

गौरतलब है कि जनवरी 2020 में जगत प्रकाश नड्डा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है, ऐसे में 2023 में ही नड्डा का कार्यकाल समाप्त हो गया था। हालांकि लोकसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें एक्सटेंशन दिया गया और यह कहा गया कि आम चुनाव के बाद ही नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा।

दो साल से ज्यादा चला जेपी नड्डा का एक्सटेंशन

लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी करीब दो साल तक भाजपा को पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं मिल सका। पार्टी की ओर से तर्क दिया गया कि कई राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे नहीं हुए हैं, इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव टाला जा रहा है। इस दौरान जेपी नड्डा को लगातार एक्सटेंशन मिलता रहा। भाजपा के गठन के बाद यह पहली बार है जब किसी राष्ट्रीय अध्यक्ष को दो साल से अधिक समय तक एक्सटेंशन दिया गया।अब नितिन नवीन को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने से यह संकेत भी मिल रहा है कि पार्टी को पूर्णकालिक अध्यक्ष मिलने में अभी और समय लग सकता है।

कौन हैं नितिन नवीन

नितिन नवीन को कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने का फैसला कई मायनों में चौंकाने वाला माना जा रहा है। वह बिहार सरकार में मंत्री हैं और बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। वह वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक नवीन किशोर सिन्हा के पुत्र हैं। नितिन नवीन कायस्थ समुदाय से आते हैं और संगठनात्मक अनुभव के तौर पर छत्तीसगढ़ में भाजपा के प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। पार्टी के अंदर उन्हें एक संगठन-कुशल नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने जमीनी स्तर से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक काम किया है।

बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कैसे होता है

भाजपा के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है। इसमें राष्ट्रीय परिषद के सदस्य और सभी प्रदेश परिषदों के सदस्य शामिल होते हैं। निर्वाचक मंडल के कम से कम 20 सदस्य संयुक्त रूप से किसी एक नाम का प्रस्ताव दे सकते हैं, लेकिन यह प्रस्ताव कम से कम पांच प्रदेश परिषदों की ओर से आना अनिवार्य होता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए वही व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है, जो कम से कम 15 वर्षों से भाजपा का सदस्य हो।

नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने के क्या है मायने

नितिन नवीन को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने फिलहाल संगठनात्मक खालीपन को भरने की कोशिश की है। हालांकि यह साफ है कि पार्टी को अभी पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने में और वक्त लग सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा संगठनात्मक चुनावों की प्रक्रिया को कितनी तेजी से पूरा करती है और स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर कब मुहर लगती है।

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