Thawe mandir chori case : बिहार के गोपालगंज स्थित थावे भवानी मंदिर में 1.08 करोड़ रुपये के आभूषण चोरी मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस हाई-प्रोफाइल कांड का मास्टरमाइंड दीपक राय घटना से ठीक छह दिन पहले पुलिस की हिरासत में आया था, लेकिन ठोस सबूत नहीं होने के कारण उसे छोड़ दिया गया। बाद में उसी आरोपी ने मंदिर में ऐतिहासिक चोरी को अंजाम दे दिया। पुलिस के अनुसार 10–11 दिसंबर की रात उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले का रहने वाला दीपक राय थावे मंदिर परिसर में रेकी कर रहा था। संदेह के आधार पर पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर करीब पांच घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान आरोपी ने खुद को प्रेमिका से मिलने आया बताया और लगातार इसी कहानी पर अड़ा रहा। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके पिता से फोन पर बात कराई और फिर सरकारी वाहन से उसे रेलवे स्टेशन तक छोड़ दिया गया।
जेल से निकलते ही रची बड़ी साजिश
गोपालगंज के एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि दीपक राय पेशेवर मंदिर चोर है। वह 13 नवंबर को जेल से रिहा हुआ था। जेल से बाहर आने के बाद उसने प्रयागराज में रहने वाली अपनी गर्लफ्रेंड से कहा था—“मैं बहुत बड़ा काम करने जा रहा हूं, अब लाइफ सेट है। पुलिस जांच में सामने आया है कि दीपक की नजर पहले महाराष्ट्र के पुणे स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर पर थी। 6 से 8 दिसंबर के बीच उसने गूगल और यूट्यूब पर मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था, गर्भगृह, मुकुट और सीसीटीवी एंगल से जुड़े वीडियो और तस्वीरें खंगालीं। इसी दौरान 8 दिसंबर की रात उसे थावे मंदिर से जुड़े वीडियो मिले। दूरी ज्यादा होने के कारण उसने पुणे की योजना छोड़ दी और थावे मंदिर को निशाना बना लिया।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से तैयार की चोरी की ब्लूप्रिंट
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने सिर्फ रेकी पर भरोसा नहीं किया। उसने 9 से 13 दिसंबर के बीच 10–12 यूट्यूब वीडियो देखे, मंदिर की वेबसाइट खंगाली, श्रद्धालुओं के वीडियो और रील्स में दिख रहे कैमरा एंगल का अध्ययन किया और गूगल मैप से रास्तों की जानकारी जुटाई। मोबाइल फोन से मिली सर्च हिस्ट्री को पुलिस ने मजबूत डिजिटल सबूत माना है। सीसीटीवी फुटेज में भी 10–11 दिसंबर की रात निर्माणाधीन भवन और मंदिर की ओर आरोपी की गतिविधियां कैद हुई हैं।
एक गुमनाम कॉल से खुला राज
एसपी ने बताया कि इस केस को सुलझाने में सबसे अहम कड़ी एक अज्ञात फोन कॉल रही। चोरी के खुलासे के लिए एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। इसके बाद एक अनजान कॉलर ने सूचना दी कि गाजीपुर का एक शातिर चोर इस वारदात के पीछे है। इसी इनपुट पर पुलिस ने गाजीपुर में छापेमारी की और दीपक राय तक पहुंची। तकनीकी जांच में मंदिर के लॉकर, दीवार और रस्सी पर मिले फिंगरप्रिंट दीपक से मैच हो गए। 22 दिसंबर की रात उसे यूपी-बिहार बॉर्डर के पास गोपालगंज से गिरफ्तार कर लिया गया।
पहले भी कर चुका है कई मंदिरों में चोरी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दीपक राय वाराणसी, मऊ समेत पूर्वांचल के कई बड़े मंदिरों में चोरी कर चुका है। मऊ के शीतला भवानी मंदिर चोरी मामले में वह मार्च 2025 में जेल गया था और 3 नवंबर को रिहा हुआ था। बाहर आते ही उसने दोबारा आपराधिक गतिविधियां शुरू कर दीं। दीपक ने पूछताछ में बताया कि उसने चोरी किए गए सभी आभूषण अपने पास नहीं रखे, बल्कि एक साथी को सौंप दिए थे ताकि पकड़े जाने पर बरामदगी न हो सके। पुलिस ने उसके पास से रॉड कटर, घटना के समय पहने कपड़े, मोबाइल फोन, बाइक और बैग बरामद किए हैं। हालांकि, आभूषण अब तक बरामद नहीं हो सके हैं।
क्या हुआ था घटना वाले दिन
17 दिसंबर को चोरों ने थावे मंदिर के गर्भगृह में घुसकर मां दुर्गा की प्रतिमा से सोने-चांदी के हार, लॉकर में रखा 251 ग्राम का सोने का मुकुट, अन्य जेवरात और 50 किलो वजनी दानपेटी चोरी कर ली थी। सिर्फ मुकुट की कीमत करीब 51 लाख रुपये आंकी गई है। कुल चोरी की राशि 1.08 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सीसीटीवी फुटेज में दो चोर नजर आए थे, जिनमें एक ने मफलर से चेहरा ढंक रखा था और दूसरा टोपी पहने हुए था। इस मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद DIG नीलेश कुमार ने टीओपी प्रभारी धीरज कुमार को निलंबित कर दिया है। चार सैप जवानों को बर्खास्त किया गया है। दूसरे आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही चोरी किए गए आभूषण भी बरामद कर लिए जाएंगे।