ऐसा है बिहार के सरकारी अस्पतालों का हाल…मरीज को चप्पल से पीटकर किया जा रहा इलाज, वीडियो वायरल

Saharsa News : बिहार के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है. सहरसा जिला अस्पताल (मॉडल हॉस्पिटल) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक का इलाज चप्पल से किए जाने का दावा किया जा रहा है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति बेहोश पड़े मरीज के पैर पर जोर-जोर से चप्पल मारकर उसे होश में लाने की कोशिश कर रहा है.

क्या है पूरा मामला

यह मामला सोमवार का बताया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बरियाही बस्ती निवासी मंजीत कुमार को बिजली का करंट लग गया था. घटना के बाद परिजन आनन-फानन में उसे बेहतर इलाज के लिए सहरसा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे. आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी. परिजनों का कहना है कि मजबूरी में उन्होंने युवक को वार्ड के एक बेड पर लिटा दिया और खुद ही उसके हाथ-पैर रगड़ने लगे. काफी देर तक कोई चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने पर साथ आए एक व्यक्ति ने युवक के पैर पर चप्पल मारनी शुरू कर दी, ताकि वह होश में आ सके. इसी दौरान वार्ड में मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

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मामले का वीडियो वायरल

वीडियो वायरल होते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया. मरीज के परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि करंट लगने जैसी गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल लाया गया, लेकिन इलाज के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं थी. परिजनों के अनुसार, काफी देर बाद एक नर्स मौके पर आई, जिसने ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई और इंजेक्शन लगाया. नर्स ने यह कहकर चली गई कि थोड़ी देर में डॉक्टर आ जाएंगे, लेकिन इसके बाद भी कोई डॉक्टर मरीज को देखने नहीं पहुंचा. वहीं, इस मामले पर सिविल सर्जन रतन झा ने कहा है कि उन्हें वायरल वीडियो की जानकारी मिली है. उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एक बोर्ड गठित किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, स्थानीय लोगों और मरीज के परिजनों का कहना है कि इस तरह के आश्वासन पहले भी दिए जाते रहे हैं और जांच व कार्रवाई की बातें अक्सर मामला शांत करने तक ही सीमित रह जाती हैं.

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यह घटना एक बार फिर बिहार के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं, डॉक्टरों की उपलब्धता और आपातकालीन व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन की जांच सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह जाती है या वास्तव में जिम्मेदार लोगों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है.

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