Vastu Tips for sun : 2026 को लेकर वास्तु शास्त्र के जानकारों का कहना है कि यह सूर्य देव का साल है और वास्तु शास्त्र में भी घर की ऊर्जा को सकारात्मक बनाए रखने के लिए जिन प्रतीकों और उपायों का उल्लेख किया गया है. इन्हीं में से एक है तांबे का सूर्य (Copper Sun). वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, घर में तांबे का सूर्य सही स्थान और दिशा में स्थापित करने से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मान-सम्मान में वृद्धि होती है.
क्यों खास है तांबे का सूर्य?
वास्तु शास्त्र में सूर्य को ऊर्जा, आत्मबल और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है. तांबा धातु स्वयं में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने की क्षमता रखती है. ऐसे में तांबे से निर्मित सूर्य का प्रतीक घर में रखने से नकारात्मक प्रभाव कम होने और सकारात्मक वातावरण बनने की मान्यता है.
किस दिशा में लगाना माना जाता है शुभ?
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, तांबे के सूर्य को पूर्व दिशा की दीवार पर लगाना सबसे शुभ माना जाता है. पूर्व दिशा को सूर्य की उदय दिशा माना जाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है. इसे घर के ड्रॉइंग रूम, हॉल या पूजा स्थल में लगाया जा सकता है. मुख्य दरवाजे के पास भी तांबे का सूर्य लगाया जा सकता है, लेकिन ध्यान रखना जरूरी है कि सूर्य का मुख घर के अंदर की ओर हो, न कि बाहर की तरफ.
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किन जगहों पर न लगाएं तांबे का सूर्य
वास्तु शास्त्र के अनुसार बेडरूम और रसोई में तांबे का सूर्य लगाना अशुभ माना जाता है. दक्षिण या पश्चिम दिशा में इसे लगाने से सकारात्मक परिणामों के बजाय नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं. जानकार कहते हैं कि तांबे के सूर्य को रविवार या मंगलवार के दिन स्थापित करना शुभ होता है. इसे दीवार पर सम्मानजनक ऊंचाई पर लगाना चाहिए, ताकि सूर्य का प्रतीक नीचे की ओर न झुका हो.
क्या हैं इसके लाभ?
मान्यताओं के अनुसार, घर में तांबे का सूर्य लगाने से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है.परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.यश, प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास बढ़ता है.नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष कम होते हैं.हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि तांबे का सूर्य टूटा, जंग लगा या काला पड़ा हुआ नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे विपरीत प्रभाव पड़ सकता है.