Bihar Cabinet Expansion : 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो गया है और अब एक बार फिर शुभ कार्यों की शुरुआत हो चुकी है. बिहार की सियासत में भी इसे लेकर हलचल तेज थी. खासतौर पर जदयू और भाजपा के कई नेताओं को उम्मीद थी कि खरमास खत्म होते ही नीतीश सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार होगा और उन्हें मंत्री पद मिल सकता है. हालांकि, सरकार से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विधायकों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है. बजट सत्र से पहले कैबिनेट एक्सटेंशन की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के चलते इस प्रक्रिया में देरी हो सकती है.
समृद्धि यात्रा के बाद में होगा फैसला
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों समृद्धि यात्रा पर हैं और 24 जनवरी तक पूरे बिहार का दौरा कर रहे हैं. इस दौरान वे विभिन्न जिलों में जाकर विकास योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं और जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं. सरकार के करीबी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल मुख्यमंत्री का पूरा फोकस इसी यात्रा पर है. वे यात्रा के दौरान मिले फीडबैक और जनता की राय को समझने के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अंतिम फैसला लेना चाहते हैं. ऐसे में कैबिनेट एक्सटेंशन यात्रा खत्म होने के बाद ही संभव माना जा रहा है.
नई नीतीश सरकार के पहली कैबिनेट में 26 मंत्री
नीतीश कुमार ने 20 नवंबर 2025 को रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसके बाद गठित पहली कैबिनेट में कुल 26 मंत्री शामिल किए गए थे. इस मंत्रिमंडल में सबसे बड़ा हिस्सा भाजपा के कोटे में गया था. भाजपा के 14 नेता मंत्री बने थे, लेकिन कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन के इस्तीफे से अब भाजपा के मंत्रियों की संख्या घटकर 13 रह गई है. वहीं, जदयू के 9 मंत्री हैं, जिनमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. लोक जन शक्ति पार्टी (रामविलास) से 2 मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा से 1-1 मंत्री शामिल हैं.
बिहार की दूसरी बड़ी खबरें देखने के लिए यहां क्लिक करें
10 मंत्री पद खाली
बिहार में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं. मौजूदा समय में 10 मंत्री पद खाली हैं. NDA के तय फॉर्मूले के मुताबिक, मंत्रिपरिषद में भाजपा से 17 मंत्री, जदयू से 15 मंत्री (मुख्यमंत्री समेत), लोक जन शक्ति पार्टी (R) से 2 मंत्री, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) से 1-1 मंत्री हो सकते हैं. इस गणित के आधार पर जदयू के 6 और भाजपा के 4 नेताओं को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है. इसी वजह से दोनों दलों के कई विधायक लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार कर रहे हैं.
बजट सत्र से पहले उम्मीद कम
हालांकि मीडिया रिपोर्ट में सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि कि बजट सत्र 2026-27 से पहले मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना कम है. मुख्यमंत्री फिलहाल अपनी यात्रा और कार्यक्रमों में व्यस्त हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि विधायकों को मंत्री बनने के लिए अभी कुछ और समय तक इंतजार करना पड़ सकता है. समृद्धि यात्रा खत्म होने के बाद ही कैबिनेट विस्तार पर गंभीरता से विचार शुरू होगा और तभी मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है. कुल मिलाकर, खरमास तो खत्म हो गया है, लेकिन बिहार की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार की घड़ी अभी कुछ दूर नजर आ रही है.