भारत की बड़ी आईटी कंपनियों में हायरिंग ठप ! शीर्ष 5 कंपनी में नौ महीनों में सिर्फ 17 नए कर्मचारी…

IT sector job : भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों में रोजगार को लेकर चिंताजनक संकेत सामने आए हैं. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में देश की पाँच बड़ी आईटी कंपनियों TCS, Infosys, Wipro, HCL Technologies और Tech Mahindra ने कुल मिलाकर सिर्फ 17 नए कर्मचारियों को जोड़ा है. जबकि पिछले साल इसी अवधि में इन कंपनियों ने करीब 17 हजार लोगों को नौकरी दी थी. इन पाँचों कंपनियों में कुल मिलाकर लगभग 15 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं. आमतौर पर जैसे-जैसे नई परियोजनाएं मिलती थीं, वैसे-वैसे बड़े पैमाने पर भर्तियाँ होती थीं. अच्छे वर्षों में यह आंकड़ा एक लाख तक पहुंच जाता था. लेकिन बीते दो वर्षों से यह सिलसिला लगभग थम सा गया है.

हायरिंग जितनी उतनी ही फायरिंग भी

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जितनी भर्तियाँ हुई हैं, लगभग उतनी ही छंटनी भी हुई है. नतीजा यह रहा कि नेट आधार पर केवल 17 कर्मचारियों की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हायरिंग लगभग बंद मानी जा रही है. देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS ने दिसंबर तक करीब 25 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर दी है, जो इस संकट की गंभीरता को दिखाता है.

AI बना सबसे बड़ा कारण

आईटी सेक्टर में हायरिंग रुकने का सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को माना जा रहा है. कंपनियाँ अब नए कर्मचारियों को रखने के बजाय AI की मदद से मौजूदा कर्मचारियों से ज्यादा काम लेने पर जोर दे रही हैं. यह ट्रेंड सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है. भारतीय इंजीनियरों को अमेरिका में भी बड़े पैमाने पर रोजगार मिलता था, लेकिन अब वहां की टेक कंपनियों की H1-B वीजा में रुचि भी कम होती जा रही है. इसी वीजा के जरिए विदेशी कर्मचारी अमेरिकी कंपनियों में काम करते हैं. कंपनियों का तर्क है कि अब कई काम AI ही कर रहा है.

Claude, Gemini और ChatGPT जैसे AI चैटबॉट्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. खासतौर पर कोडिंग के लिए Claude Code को बेहद सक्षम माना जा रहा है,जो अब तक आईटी इंजीनियरों का मुख्य काम रहा है.

Goldman Sachs की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Goldman Sachs की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में अमेरिकी कंपनियों का करीब 25 प्रतिशत काम AI संभाल लेगा. इस रिपोर्ट के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या इंसानों का भविष्य भी घोड़ों जैसा हो जाएगा,जो कभी परिवहन का मुख्य साधन थे, लेकिन तकनीक के आने के बाद हाशिये पर चले गए. आईटी सेक्टर में बदलते हालात ने लाखों युवाओं के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या आने वाले दौर में नौकरियों का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा? और क्या स्किल्स को नए सिरे से गढ़ना अब मजबूरी बन चुका है?

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