Bihar Republic Day Parade : 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाले राष्ट्रीय समारोह में इस बार बिहार की झांकी शामिल नहीं की गई है. इसके चलते बिहारवासियों को इस बार अपने राज्य की सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास की झलक झांकी के माध्यम से देखने का मौका नहीं मिलेगा.
रोटेशन नीति बनी झांकी से बाहर होने की वजह
गौरतलब है कि करीब नौ साल के लंबे इंतजार के बाद वर्ष 2025 में बिहार की झांकी को कर्तव्य पथ पर स्थान मिला था. उस झांकी ने राज्य की ऐतिहासिक और बौद्ध विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया था. लेकिन इस साल एक बार फिर बिहार को झांकियों की सूची से बाहर रखा गया है, जिससे राज्य के लोगों में निराशा है. पिछले कुछ वर्षों में झांकियों के चयन को लेकर उठे विवादों के बाद रक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक नई रोटेशन नीति लागू की है. इसके तहत हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को तीन वर्षों के भीतर कम से कम एक बार झांकी प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा. बिहार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इसी रोटेशन नीति के तहत इस वर्ष बिहार को झांकियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है.
2025 में नालंदा की विरासत बनी थी झांकी का विषय
9 साल बाद पिछले वर्ष 2025 में गणतंत्र दिवस की झांकी में बिहार की ओर से नालंदा की प्राचीन विरासत को केंद्र में रखा गया था. झांकी के माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक महत्ता, उसके संरक्षण के प्रयास और आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना को दर्शाया गया था. झांकी में भगवान बुद्ध की दिव्य और भव्य प्रतिमा के साथ-साथ घोड़ा कटोरा झील को इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने की पहल भी प्रदर्शित की गई थी. इसका उद्देश्य शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में बिहार की पहचान को फिर से स्थापित करना था.