UGC Rule Controversy : सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि नियमों के मौजूदा प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और नियमों का ड्राफ्ट दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी. तब तक देशभर में वर्ष 2012 के UGC नियम ही लागू रहेंगे.
कंचना यादव के बयान से बढ़ा विवाद
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से पेश एडवोकेट ने हाल ही में आए एक राजनीतिक बयान का हवाला देते हुए नए नियमों की मंशा पर सवाल उठाया. हालांकि एडवोकेट ने किसी नेता का नाम नहीं लिया ,लेकिन कोर्ट को बताया गया कि सार्वजनिक मंचों पर यह कहा जा रहा है कि इन नियमों के जरिए सामान्य वर्ग को झूठे मामलों में फंसाया जाना चाहिए. इस पर पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा प्रारूप को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि नियमों का गलत इस्तेमाल संभव है. इसी आधार पर कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने का फैसला किया.
जानकारी के लिए बता दें कि 27 जनवरी को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. कंचना यादव का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. एक इंटरव्यू में उन्होंने UGC के नए नियमों का समर्थन करते हुए कहा था कि हजारों वर्षों से SC/ST और OBC वर्गों के साथ अत्याचार और भेदभाव होता रहा है. उन्होंने यह भी कहा था कि अगर नए नियमों के लागू होने से सामान्य वर्ग को डर लग रहा है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जाएगा, तो उन्हें फंसाया ही जाना चाहिए, ताकि ऐतिहासिक अन्याय का बदला लिया जा सके. इस बयान के बाद UGC के नए नियमों के खिलाफ चल रहे विरोध ने और तीखा रूप ले लिया. सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान इसी तरह की फंसाने की सोच का जिक्र किए जाने के बाद कोर्ट ने नियमों पर सख्त रुख अपनाया.
सरकार की चुप्पी पर भी सवाल
दिलचस्प बात यह है कि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से नए नियमों का जोरदार बचाव नहीं किया गया. जबकी जानकारों की मानें तो आमतौर पर ऐसा नहीं होता है. जब किसी कानून या सर्कुलर को कोर्ट में चुनौती दी जाती है, तो सरकार उसका पुरजोर विरोध करती है. लेकिन इस मामले में सरकार चुप नजर आई. सरकार की चुप्पी पर विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार इस मुद्दे पर राजनीतिक दुविधा में फंस गई है. दरअसल UGC के नए नियम का RJD ने खुलकर समर्थन किया है. पार्टी के समर्थन के पीछे जो वजह है वो ये कि पार्टी लंबे समय से OBC और सामाजिक न्याय की राजनीति करती रही है और UGC जैसे मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाकर पार्टी अपने कोर वोटबैंक को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रही है. जबकी भाजपा अपने पारंपरिक वोटर सामान्य वर्ग से आगे पैर पसारने की कोशिश में हाल के वर्षों में दलित और OBC वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इसी को लेकर भाजपा ने यह कदम उठाया लेकिन, केंद्र सरकार को यह अंदाजा नहीं था कि UGC के नए नियमों का सवर्ण वर्ग इतना तीखा विरोध करेगा और खुलकर सरकार के खिलाफ खड़ा हो जाएगा. इससे सरकार के सामने असहज स्थिति पैदा हो गई.
सुप्रीम कोर्ट के स्टे से सरकार को राहत
हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियमों पर रोक लगाए जाने के बाद सरकार को इस राजनीतिक दुविधा से आंशिक राहत मिली है. क्योंकि राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस फैसले से दलित और OBC वर्ग के बीच यह संदेश जाएगा कि सरकार नियमों के पक्ष में थी, लेकिन कोर्ट ने हस्तक्षेप किया. वहीं सामान्य वर्ग इसे अपनी जीत के रूप में देख रहा है. अब 19 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में यह तय होगा कि UGC के नए नियम किस रूप में आगे बढ़ते हैं या सरकार को इन्हें पूरी तरह नए सिरे से तैयार करना पड़ेगा.