बांग्लादेश चुनाव में BNP बड़ी जीत के करीब… तारिक रहमान हो सकते हैं देश के अगले प्रधानमंत्री

Tarique Rahman : बांग्लादेश के आम चुनावों में Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने शुरुआती रुझानों और अब तक घोषित नतीजों में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. चुनाव आयोग द्वारा जारी आंशिक परिणामों के अनुसार, बीएनपी और उसके सहयोगी दल स्पष्ट बढ़त बनाए हुए हैं. इसके साथ ही पार्टी प्रमुख Tarique Rahman के देश के अगले प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं तेज हो गई हैं. हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक औपचारिक घोषणा नहीं की गई है. इस चुनाव में बीएनपी के नेतृत्व वाले गठबंधन और Bangladesh Jamaat-e-Islami के नेतृत्व वाले गुटों के बीच सीधा मुकाबला देखा गया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है, जिसका लाभ बीएनपी को मिलता दिख रहा है.

कौन हैं Tarique Rahman

बीएनपी की तीन बार प्रधानमंत्री रहीं Khaleda Zia का 30 दिसंबर को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था. उनके निधन के बाद पार्टी नेतृत्व में बड़ा बदलाव देखने को मिला. 17 वर्षों के स्व-निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को देश लौटे तारिक रहमान को पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. तारिक रहमान वर्ष 2008 से लंदन में रह रहे थे और वहीं से वर्चुअल माध्यमों के जरिए पार्टी गतिविधियों का संचालन कर रहे थे. 2018 में जब खालिदा जिया जेल में थीं, तब उन्हें बीएनपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. पार्टी पहले ही संकेत दे चुकी थी कि यदि जिया चुनाव बाद सक्रिय राजनीति में सक्षम नहीं रहीं, तो रहमान को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाया जाएगा.

छात्र राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर

60 वर्षीय तारिक रहमान का राजनीतिक जीवन छात्र और जनांदोलन की राजनीति से शुरू हुआ. उन्होंने 1988 में बीएनपी की गबतली उपजिला इकाई के सामान्य सदस्य के रूप में पार्टी की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की थी. 1991 के आम चुनावों से पहले उन्होंने देशभर में अपनी मां के साथ व्यापक प्रचार अभियान चलाया. 2002 में उन्हें बीएनपी का वरिष्ठ संयुक्त महासचिव बनाया गया और 2009 में वे वरिष्ठ उपाध्यक्ष बने. पार्टी संगठन में उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई. 1993 में बोगुरा जिला इकाई के सम्मेलन का आयोजन और गुप्त मतदान के जरिए नेतृत्व चयन की पहल को उनके संगठनात्मक कौशल का उदाहरण माना जाता है.

भारत के साथ कैसा है BNP का संबंध

भारतीय रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही खालिदा जिया के कार्यकाल के दौरान बीएनपी पर कट्टरपंथी इस्लामवादी समूहों और पाकिस्तान समर्थक रुख अपनाने के आरोप लगे थे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में भारत तारिक रहमान के नेतृत्व के साथ व्यावहारिक संबंध बनाए रखने की कोशिश कर सकता है. बीएनपी के 51-सूत्रीय घोषणापत्र में पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दिया गया है. इसके अलावा हिंदू और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने का भी वादा किया गया है.

BNP बहुमत के करीब

हालांकि रुझान स्पष्ट रूप से बीएनपी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अंतिम और आधिकारिक परिणामों की घोषणा के बाद ही सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होगी. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि संसदीय दल की बैठक के बाद ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी. देश और क्षेत्र की राजनीति में यह चुनाव महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब बांग्लादेश आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *