अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमत में उछाल…ऐसा हुआ तो 100 डॉलर पार कर सकता है भाव

Crude oil : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर पड़ सकता है. जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज की रविवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, यदि तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होता है तो कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. वहीं, अगर स्थिति बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदलती है तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं. फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 72.8 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है. रिपोर्ट के अनुसार, सीमित जवाबी कार्रवाई की स्थिति में कीमतों में 5–10 डॉलर प्रति बैरल तक की बढ़ोतरी हो सकती है. यदि ईरानी तेल अवसंरचना को नुकसान पहुंचता है तो यह बढ़ोतरी 10–12 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है.

भारत के आयात बिल पर पड़ेगा असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में प्रति 1 डॉलर की वृद्धि से भारत का वार्षिक आयात बिल लगभग 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है. इससे देश के व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है. वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जबकि भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 40 प्रतिशत से अधिक इसी मार्ग से आता है. ऐसे में इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

शेयर बाजार में सेक्टोरल असर की संभावना

ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, निकट भविष्य में बाजार की धारणा आय-आधारित ट्रेडिंग से हटकर तेल-आधारित ट्रेडिंग की ओर शिफ्ट हो सकती है. ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र को अपेक्षाकृत समर्थन मिल सकता है, जबकि तेल पर निर्भर क्षेत्रों जैसे तेल विपणन कंपनियां, पेंट, टायर, विमानन और केमिकल सेक्टर पर दबाव बन सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा आर्थिक वृद्धि परिदृश्य में भारतीय शेयर बाजारों के लिए कच्चा तेल एक प्रमुख मैक्रो वैरिएबल बना हुआ है. रुपये में कमजोरी की आशंका जताई गई है और जरूरत पड़ने पर भारतीय रिज़र्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार के जरिए हस्तक्षेप कर सकता है.

लॉजिस्टिक्स और बीमा लागत में बढ़ोतरी का जोखिम

लंबे समय तक तनाव बने रहने की स्थिति में समुद्री बीमा और रसद लागत बढ़ सकती है. खाड़ी क्षेत्र के शिपिंग मार्गों में व्यवधान आने से व्यापार संतुलन पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है. रिपोर्ट के मुताबिक ऊंचे कच्चे तेल दामों से ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को लाभ मिल सकता है. वहीं, रक्षा क्षेत्र की कंपनियां जैसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के शेयरों में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है.

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