Bihar politics : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में सत्तारूढ़ एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी पांच सीटें जीत लीं. चुनाव परिणाम ने विपक्षी महागठबंधन की रणनीति, आपसी तालमेल और विधायकों की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महागठबंधन की ओर से पूरी तैयारी और जोड़-तोड़ के बावजूद अंतिम समय में चार विधायकों की अनुपस्थिति ने खेल पलट दिया.
खुद निगरानी कर रहे थे तेजस्वी
चुनाव से पहले विपक्षी खेमे में एकजुटता बनाए रखने के लिए महागठबंधन के विधायकों को पटना के एक होटल में ठहराया गया था. बताया जाता है कि Tejashwi Yadav स्वयं इस बात पर नजर रख रहे थे कि किसी विधायक को कोई परेशानी न हो. राजनीतिक समीकरण मजबूत करने के लिए उन्होंने Asaduddin Owaisi की पार्टी All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen के रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया था. इससे संकेत मिल रहे थे कि विपक्षी एकता मजबूत है.
चार सीटें आसानी से जीता एनडीए
संख्या बल के आधार पर एनडीए को चार सीटें जीतने में कोई कठिनाई नहीं हुई. मुख्यमंत्री Nitish Kumar को 44 वोट मिले, बीजेपी नेता Nitin Nabin को भी 44 वोट, जेडीयू के Ramnath Thakur को 42 वोट और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के Upendra Kushwaha को 42 वोट मिले. इन चारों उम्मीदवारों की जीत पहले से ही लगभग तय मानी जा रही थी. असल राजनीतिक संघर्ष पांचवीं सीट पर था. यह मुकाबला बीजेपी उम्मीदवार Shivesh Ram और आरजेडी के Amarendra Dhari Singh के बीच था. पहली वरीयता के वोटों में बीजेपी उम्मीदवार को 30 वोट मिले, लेकिन दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती में वे आगे निकल गए और जीत हासिल कर ली.
AIMIM के समर्थन के बावजूद क्यों हारा महागठबंधन?
पांचवीं सीट के लिए All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen के विधायकों को निर्णायक माना जा रहा था. कहा जा रहा था कि अगर वे महागठबंधन के साथ रहते हैं तो जीत तय है. हालांकि समर्थन मिलने के बावजूद विपक्ष हार गया. जिसका मुख्य कारण था, चार विधायकों का मतदान से अनुपस्थित रहना. दरअसल कांग्रेस के तीन विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए.आरजेडी का एक विधायक भी अनुपस्थित रहा,इससे महागठबंधन का गणित बिगड़ गया और एनडीए को बढ़त मिल गई. अनुपस्थित विधायकों में Surendra Kushwaha, Manoj Yadav,Manohar Prasad Singh और आरजेडी के Faisal Rahman का नाम है. इनकी अनुपस्थिति ने चुनावी नतीजों पर सीधा असर डाला.
तालमेल की कमी भी बनी कारण
चुनाव के बाद महागठबंधन नेताओं ने हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगाए. विपक्ष का कहना है कि संख्या उनके पक्ष में थी, लेकिन अंतिम समय में विधायकों के टूटने से परिणाम बदल गया. वहीं एनडीए नेताओं ने इसे विपक्ष की संगठनात्मक कमजोरी और रणनीतिक विफलता बताया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महागठबंधन में दलों के बीच समन्वय कमजोर था, कांग्रेस नेतृत्व की सक्रियता कम दिखी और एनडीए ने बेहतर प्रबंधन और निगरानी की.इसी वजह से विपक्ष का गणित बिगड़ गया और सत्तारूढ़ गठबंधन ने पूरी बाज़ी मार ली. बिहार राज्यसभा चुनाव ने साफ कर दिया कि केवल संख्या बल ही नहीं, बल्कि संगठन, रणनीति और अंतिम समय की राजनीतिक प्रबंधन क्षमता भी चुनावी जीत तय करती है.