Right Time to Eat Fruits : बदलती जीवनशैली में शादी-ब्याह, पार्टियों और होटलों में खाने के साथ फल परोसना अब आम बात हो गई है. बच्चे हों या बड़े, अधिकांश लोग बिना सोचे-समझे भोजन के साथ फल खा लेते हैं. हालांकि, आयुर्वेद के अनुसार यह आदत स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकती है. आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि फल और पका हुआ भोजन दोनों की पाचन प्रक्रिया अलग-अलग होती है. जहां दाल, रोटी और चावल जैसे भोजन को पचने में अधिक समय लगता है, वहीं फल जल्दी पच जाते हैं. ऐसे में दोनों को एक साथ खाने पर पाचन तंत्र पर असर पड़ता है.
ठंडे और स्टोरेज वाले फल बढ़ा सकते हैं समस्या
विशेषज्ञों के मुताबिक होटल या फंक्शन में परोसे जाने वाले फल अक्सर ठंडे या लंबे समय तक स्टोर किए गए होते हैं. इससे पाचन अग्नि कमजोर हो सकती है, जिसके कारण खाना पेट में ठीक से पच नहीं पाता और सड़ने लगता है. भोजन के साथ फल खाने से शरीर में कई तरह की परेशानियां बढ़ सकती हैं, जैसे गैस और कब्ज ,पेट में भारीपन ,अम्लता (एसिडिटी) और शरीर में विषाक्त पदार्थों का जमाव हो सकता है आयुर्वेद के अनुसार, फल और भोजन दोनों का पूरा पोषण तभी मिलता है जब इन्हें अलग-अलग समय पर खाया जाए.
क्या है फल खाने का सही समय
आयुर्वेद भोजन को एक विज्ञान मानता है, जिसमें समय, मात्रा और संयोजन का विशेष महत्व होता है. जैसे कि सुबह खाली पेट फल खाना फायदेमंद माना जाता है. लेकिन सुबह खट्टे फलों से बचने की सलाह दी जाती है. वहीं शाम को सूर्यास्त से पहले भी फल खाए जा सकते हैं फलों को दूध या दही के साथ न खाएं, इसे आयुर्वेद में विरुद्ध आहार माना गया है. फल खाने के बाद कम से कम 1 घंटे तक भोजन न करें बल्की फल पचने के बाद ही मुख्य भोजन करें. विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय और सही तरीके से फल खाने पर ही शरीर को उनका पूरा लाभ मिलता है.