महिलाओं में दिल की बीमारियों का बढ़ रहा खतरा…जानें क्या हैं कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के शुरुआती लक्षण

Heart attack symptoms in females : भारत में दिल से जुड़ी बीमारियां (कार्डियोवस्कुलर डिजीज) महिलाओं की मौत का एक बड़ा कारण बनती जा रही हैं. साल 2019 की एक प्रमुख स्टडी के अनुसार देश में होने वाली कुल मौतों में लगभग 28% मौतें हृदय रोगों की वजह से होती हैं. इनमें सबसे अधिक घातक बीमारी कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) है.

विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय महिलाओं में यह बीमारी पश्चिमी देशों की महिलाओं की तुलना में 5 से 10 साल पहले देखने को मिल रही है. इसके पीछे बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं जैसे मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, एक्सरसाइज की कमी और पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज) प्रमुख कारण हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5, 2019–21) के मुताबिक करीब 24% भारतीय महिलाएं ओवरवेट या मोटापे की शिकार हैं और लगभग 21% महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर है. विशेषज्ञ बताते हैं कि पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं में आगे चलकर दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि इसमें हार्मोनल के साथ-साथ मेटाबॉलिक समस्याएं भी जुड़ी होती हैं.

महिलाओं में अलग होते हैं हार्ट अटैक के लक्षण

डॉक्टरों के अनुसार महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग हो सकते हैं. जहां पुरुषों में सीने में तेज दर्द आम होता है, वहीं महिलाओं में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • अचानक सांस फूलना
  • अत्यधिक थकान
  • पसीना आना
  • जबड़े या गर्दन में दर्द
  • गैस या एसिडिटी जैसा महसूस होना

ऐसे लक्षण 15–20 मिनट से ज्यादा बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.

कम उम्र में बढ़ रहा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि अब 30–40 साल की महिलाओं में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

  • तनावपूर्ण जीवनशैली
  • शारीरिक गतिविधि की कमी
  • अनियमित खानपान
  • आनुवंशिक कारण
  • गर्भावस्था से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ाती हैं रिस्क

जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य जटिलताएं होती हैं, उनमें भविष्य में दिल की बीमारी का खतरा अधिक होता है. इसलिए ऐसी महिलाओं को लंबे समय तक नियमित जांच कराते रहना चाहिए.

इलाज में भी असमानता

रिपोर्ट्स के मुताबिक महिलाओं में हार्ट अटैक के बाद सही समय पर इलाज, जैसे एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी, पुरुषों की तुलना में कम किया जाता है. कई बार महिलाएं खुद भी अपने लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है.

बचाव के लिए क्या करें?

दिल की बीमारी सिर्फ पुरुषों को होती है, कम उम्र की महिलाओं को हार्ट अटैक नहीं होता और हल्का दर्द या गैस जैसी समस्या गंभीर नहीं होती, ये आम मिथक काफी खतरनाक हैं और विशेषज्ञ इन सभी धारणाओं को गलत बताते हैं. डॉक्टरों के अनुसार लगभग 90% हार्ट अटैक को रोका जा सकता है यदि महिलाएं अपनी जीवनशैली में सुधार करें:

  • रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम
  • संतुलित आहार (फल, सब्जियां, नट्स)
  • नमक, चीनी और तले हुए खाने से परहेज
  • धूम्रपान से दूरी
  • नियमित जांच (ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल)
  • पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन

डॉक्टरों का कहना है कि एक स्वस्थ महिला से ही स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज बनता है. इसलिए महिलाओं को अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए और दिल से जुड़े किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. दिल की बीमारियां अब सिर्फ पुरुषों की समस्या नहीं रहीं. महिलाओं को भी उतनी ही जागरूकता और समय पर इलाज की जरूरत है. थोड़ी सी सावधानी और नियमित जांच से बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है.

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