चुनाव खत्म होने का इंतजार कर रही है सरकार..! पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती का ये है असली मकसद

India fuel prices : देश और दुनिया इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं. एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, खासकर ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाला है. वहीं दूसरी ओर भारत में सरकार आम लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि हालात नियंत्रण में हैं.

प्रधानमंत्री के बयान और संकेत

हाल ही में संसद में संबोधन के दौरान नरेंद्र मोदी ने स्वीकार किया कि वैश्विक परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण हैं और उनका असर लंबे समय तक रह सकता है. उन्होंने लोगों से संयम और एकजुटता बनाए रखने की अपील की, साथ ही कोरोना काल जैसी तैयारी की जरूरत पर भी जोर दिया. प्रधानमंत्री के बयान के बाद लोगों में यह सवाल उठने लगा कि क्या देश फिर से लॉकडाउन जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है. हालांकि फिलहाल सरकार ने ऐसे किसी कदम से इनकार किया है. पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद की सप्लाई को लेकर भी आश्वासन दिया जा रहा है कि कोई कमी नहीं होगी. उधर राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मौजूदा सरकारी फैसलों के पीछे एक बड़ा कारण 29 अप्रैल भी हो सकता है, क्योंकि इस तारीख तक कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया पूरी होनी है. खासकर पश्चिम बंगाल को लेकर सत्ताधारी दल की रणनीति पर नजर है.

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती

सरकार ने 27 मार्च को बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की. इस कदम का उद्देश्य बढ़ती अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देना बताया गया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार का लक्ष्य दो चीजें सुनिश्चित करना है कि आम जनता पर कीमतों का बोझ कम रहे और देश में ईंधन की सप्लाई बनी रहे. वहीं विपक्ष इस कदम को चुनावी रणनीति बता रहा है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार पहले टैक्स बढ़ाकर जनता से पैसा वसूलती है और फिर चुनाव के समय राहत देकर इसे उपकार के रूप में पेश करती है. हालांकि इससे इतर सरकार के दावों के बावजूद कई जगहों से पेट्रोल, डीजल और गैस के लिए लंबी कतारों की खबरें सामने आ रही हैं. इस बीच योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और सरकार के साथ मिलकर काम करने की अपील की.

चुनाव के बाद क्या होगा?

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह राहत 29 अप्रैल के बाद भी जारी रहेगी? इतिहास बताता है कि चुनावों के बाद अक्सर कीमतों में बदलाव देखने को मिलता है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अभी जो आर्थिक बोझ सरकार उठा रही है, वह बाद में किसी न किसी रूप में आम जनता तक पहुँच सकता है. इसलिए फिलहाल तो सरकार राहत देने की मुद्रा में है, लेकिन यह राहत कितनी स्थायी होगी, यह काफी हद तक चुनावी नतीजों और वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा.

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