बिहार में EWS प्रमाण पत्र को लेकर नई गाइडलाइन जारी, जानें क्या है नया प्रक्रिया

Ews certificate bihar : बिहार में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर लोगों को लंबे समय से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. कभी फाइलें अटक जाती थीं, तो कभी नियमों को लेकर भ्रम बना रहता था. अलग-अलग जिलों में अलग प्रक्रिया होने से भी आवेदकों को दिक्कतें होती थीं. इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए बिहार सरकार ने अब एक नई और स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है. सामान्य प्रशासन विभाग ने 28 सवाल-जवाब के फॉर्मेट में यह गाइड तैयार की है, जिससे आम लोगों को EWS प्रमाण पत्र से जुड़ी पूरी प्रक्रिया आसानी से समझ में आ सके.

क्या है EWS प्रमाण पत्र?

EWS प्रमाण पत्र आय और संपत्ति से जुड़ा एक आधिकारिक दस्तावेज है. इसके जरिए सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण का लाभ मिलता है.

कौन बनवा सकता है EWS प्रमाण पत्र?

EWS प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है. नई गाइडलाइन के अनुसार आवेदक सामान्य (General) वर्ग का होना चाहिए. परिवार की वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होनी चाहिए

संपत्ति से जुड़े नियम

नई गाइडलाइन के अनुसार सरकार ने स्पष्ट किया है कि अधिक संपत्ति वाले लोग इस श्रेणी में नहीं आएंगे. जैसे कि EWS श्रेणी में होने के लिए आवेदक के पास 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए. शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग अलग मानक तय किए गए हैं. शहरी क्षेत्र में 1000 वर्ग फुट से बड़ा फ्लैट नहीं होना चाहिए और 100 वर्ग गज से बड़ा प्लॉट नहीं होना चाहिए, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 200 वर्ग गज से अधिक आवासीय जमीन नहीं होनी चाहिए

आय को लेकर बड़ा बदलाव

पहले आय की गणना को लेकर काफी भ्रम था. अब इसे स्पष्ट कर दिया गया है कि केवल पति-पत्नी और उनके बच्चों की आय जोड़ी जाएगी और माता-पिता की आय इसमें शामिल नहीं होगी. इस बदलाव से उन आवेदकों को राहत मिलेगी जिनके आवेदन पहले इसी वजह से अटक जाते थे.

28 सवाल-जवाब वाली गाइड क्यों खास?

नई गाइडलाइन में आम लोगों के सभी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सरल भाषा में दिए गए हैं, जैसे आवेदन फॉर्म कैसे भरें,कौन-कौन से दस्तावेज लगेंगे,सत्यापन प्रक्रिया कैसे होगी और प्रशासन को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं. सरकार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों में एक समान नियम लागू होंगे, बिना जांच के प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा और गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. नई व्यवस्था से प्रक्रिया तेज होगी, नियमों में पारदर्शिता आएगी, बार-बार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और सही पात्र लोगों को इसका लाभ मिलेगा. कूल मिलाकर आम लोगों को होगा फायदा?

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