Census 2027 : देश की सबसे बड़ी सांख्यिकीय प्रक्रिया जनगणना 2027 की तैयारी बिहार में तेज़ हो गई है. इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में आयोजित की जा रही है, जिसमें कई नए नियम लागू किए गए हैं. हालांकि, इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है, बिहार के मूल निवासी जो राज्य से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, वे सेल्फ-इन्युमरेशन फॉर्म नहीं भर सकेंगे.
मकानों की गणना और 33 सवालों का सर्वे
पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार जनगणना के नियम अधिक स्पष्ट और सख्त बनाए गए हैं. 2 मई से शुरू होने वाले पहले चरण को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारी पूरी कर ली है. जनगणना का पहला चरण 2 मई से 31 मई तक चलेगा, जिसमें मकानों की नंबरिंग और गणना की जाएगी. इसके साथ ही नागरिक 1 मई तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 33 सवालों का जवाब देकर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं. हालांकि यह सुविधा राज्य से बाहर पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए उपलब्ध नहीं होगी. प्रशासन के अनुसार, किराये पर रहने वाले लोग और प्रवासी मजदूर, जो अपने कार्यस्थल पर निवास कर रहे हैं, वे पोर्टल के माध्यम से स्वघोषणा (सेल्फ-इन्युमरेशन) कर सकते हैं.
पटना जिले में व्यापक तैयारी
पटना जिले में इस प्रक्रिया को 46 चार्ज क्षेत्रों में पूरा किया जाएगा. इसके लिए हजारों की संख्या में जनगणनाकर्मी और ऑब्ज़र्वर तैनात किए गए हैं. साथ ही जीविका दीदियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को जागरूकता अभियान में शामिल किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके. जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी. इसका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए किया जाएगा. साथ ही, किसी भी व्यक्ति से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा, जिससे आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
विकास की आधारशिला है जनगणना डेटा
अधिकारियों के अनुसार, जनगणना केवल आबादी की गिनती नहीं है, बल्कि यह देश के विकास की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण आधार है. शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के निर्माण में इन आंकड़ों की अहम भूमिका होती है.