सोशल मीडिया पर बिहार की सबसे चमकीली तस्वीर वायरल…नासा के मैप को लेकर कैसी सियासत ?

Bihar nasa image : हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश और खासकर बिहार पृथ्वी के सबसे रोशन क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं. इस तस्वीर को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक ग्लोबल नाइट लाइट मैप से जोड़ा जा रहा है. अब यह तस्वीर सिर्फ इंटरनेट चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि बिहार की राजनीति में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है.

क्या है पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि 13 अप्रैल को जारी एक वैश्विक मानचित्र में 2014 से 2022 के बीच पृथ्वी पर रात के समय रोशनी में हुए बदलाव को दर्शाया गया है. वैज्ञानिकों ने लगभग 9 वर्षों में एकत्र की गई लाखों सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर यह मैप तैयार किया है. इसमें उत्तरी भारत, विशेष रूप से बिहार में रात के समय रोशनी में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई गई है.

नेताओं ने जोड़ा विकास से

इस तस्वीर के सामने आने के बाद बिहार के कई नेताओं ने इसे राज्य के विकास से जोड़ते हुए सरकार की उपलब्धि बताया है. सत्ताधारी दल के नेताओं का कहना है कि पिछले दो दशकों में राज्य में बिजली और आधारभूत संरचना में हुए सुधार का यह प्रत्यक्ष प्रमाण है. राज्यसभा सांसद संजय झा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बिहार अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक तेजी से चमक रहा है और इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व का परिणाम बताया. वहीं हाल ही में पदभार संभालने वाले डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा (या संदर्भित नेता) ने भी बिजली उत्पादन में वृद्धि और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को इसका कारण बताया.

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

सरकारी पक्ष का दावा है कि वर्ष 2005 के आसपास बिहार में बिजली आपूर्ति लगभग 700 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 8000–9000 मेगावाट तक पहुंच चुकी है. नेताओं का कहना है कि बिजली और संचार क्षेत्र में निवेश से ही गरीबी उन्मूलन और आर्थिक विकास को गति मिलती है. हालांकि इस दावे पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग इसे बिहार के विकास का संकेत मान रहे हैं, जबकि अन्य लोग इस निष्कर्ष पर सवाल भी उठा रहे हैं, जैसे कि क्या रोशनी का बढ़ना सीधे तौर पर समग्र विकास का संकेत माना जा सकता है.

क्या कहती है तस्वीर?

विशेषज्ञों के अनुसार, नाइट लाइट डेटा का उपयोग आमतौर पर शहरीकरण, आर्थिक गतिविधियों और ऊर्जा उपयोग के संकेतक के रूप में किया जाता है. लेकिन इसे विकास का एकमात्र पैमाना नहीं माना जा सकता. कुल मिलाकर वायरल तस्वीर ने बिहार की प्रगति पर एक नई बहस छेड़ दी है. जहां एक ओर इसे विकास की उपलब्धि बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सिर्फ रोशनी ही वास्तविक विकास का सही पैमाना है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *