Samrat cabinet ministers list : बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के गठन के 22 दिन बाद गुरुवार को मंत्रिमंडल का पहला बड़ा विस्तार किया गया. राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने 32 नेताओं को मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस विस्तार के जरिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बिहार की जातीय और सामाजिक राजनीति को साधने की कोशिश की है. मंत्रिमंडल विस्तार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) दोनों ने अपने-अपने राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को शामिल किया है. बीजेपी कोटे से 15, जेडीयू कोटे से 13, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से 2 तथा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं.
बीजेपी का पलड़ा भारी लेकिन जेडीयू की भूमिका भी अहम
कैबिनेट विस्तार के बाद बिहार सरकार में बीजेपी का प्रभाव पहले से अधिक मजबूत नजर आ रहा है. हालांकि जेडीयू ने भी अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व दिया है. दोनों दलों ने सवर्ण, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और मुस्लिम समुदायों के बीच संतुलन बनाने की रणनीति अपनाई है. बीजेपी ने अपने कोटे से 15 मंत्रियों में 6 सवर्ण, 7 ओबीसी और अति पिछड़ा वर्ग तथा 2 दलित नेताओं को जगह दी है. वहीं जेडीयू ने 13 मंत्रियों में पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और मुस्लिम समुदाय को प्राथमिकता दी है.
बीजेपी कोटे से मंत्री बने नेताओं की सूची और जातीय समीकरण
बीजेपी ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार में भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, यादव, वैश्य, मल्लाह, पासवान और रविदास समाज को प्रतिनिधित्व दिया है. पार्टी ने खास तौर पर सवर्ण और अति पिछड़ा वर्ग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है.
- विजय कुमार सिन्हा — भूमिहार (सवर्ण)
- दिलीप जायसवाल — कलवार/वैश्य (पिछड़ा)
- रामकृपाल यादव — यादव (पिछड़ा)
- मिथलेश तिवारी — ब्राह्मण (सवर्ण)
- रमा निषाद — मल्लाह (अति पिछड़ा)
- केदार गुप्ता — कानू/वैश्य (अति पिछड़ा)
- नीतीश मिश्रा — ब्राह्मण (सवर्ण)
- प्रमोद चंद्रवंशी — चंद्रवंशी (अति पिछड़ा)
- लखेंद्र पासवान — पासवान (दलित)
- संजय टाइगर — राजपूत (सवर्ण)
- ई. कुमार शैलेन्द्र — भूमिहार (सवर्ण)
- अरुण शंकर प्रसाद — सूड़ी/वैश्य (पिछड़ा)
- रामचंद्र प्रसाद — तेली (अति पिछड़ा)
- नंद किशोर राम — रविदास (दलित)
- श्रेयसी सिंह — राजपूत (सवर्ण)
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने इस विस्तार के जरिए सवर्ण वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ अति पिछड़ा और दलित वर्ग में भी अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया है.
जेडीयू ने पिछड़ा-अति पिछड़ा और दलित समीकरण पर लगाया दांव
जेडीयू ने अपने कोटे में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व दिया है. पार्टी ने कुर्मी, धानुक, कुशवाहा, मल्लाह और दलित समुदाय के नेताओं को शामिल कर अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश की है.
- श्रवण कुमार — कुर्मी (पिछड़ा)
- निशांत कुमार — कुर्मी (पिछड़ा)
- मदन सहनी — मल्लाह (अति पिछड़ा)
- लेसी सिंह — राजपूत (सवर्ण)
- दामोदर रावत — धानुक (अति पिछड़ा)
- श्रीभगवान सिंह कुशवाहा — कुशवाहा (पिछड़ा)
- बुलो मंडल — धानुक (अति पिछड़ा)
- श्वेता गुप्ता — सूड़ी/वैश्य (पिछड़ा)
- सुनील कुमार — रविदास (दलित)
- शीला मंडल — धानुक (अति पिछड़ा)
- रत्नेश सदा — मुसहर (दलित)
- जमा खान — मुस्लिम
- अशोक चौधरी — पासी (दलित)
जेडीयू ने इस विस्तार में मुस्लिम समुदाय को भी प्रतिनिधित्व देकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. वहीं दलित और अति पिछड़ा वर्ग को पर्याप्त हिस्सेदारी देकर पार्टी ने अपने पुराने सामाजिक समीकरण को बनाए रखने पर जोर दिया है.
सहयोगी दलों को भी मिला प्रतिनिधित्व
एनडीए के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में शामिल कर गठबंधन धर्म निभाने की कोशिश की गई है. चिराग पासवान की पार्टी से दो नेताओं को मंत्री बनाया गया है. पार्टी ने संजय पासवान (दलित) और संजय सिंह (सवर्ण) को मंत्री बनाया है. वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी से उनके बेटे संतोष कुमार सुमन को मंत्री बनाया गया है. वे मुसहर (दलित) समुदाय से आते हैं और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से दीपक प्रकाश को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई. वे कुशवाहा (पिछड़ा) समुदाय से आते हैं.