heatwave india : देश के कई हिस्सों में इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है. तापमान लगातार नए स्तर छू रहा है और लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं. लेकिन सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर भारत में इतनी भयंकर गर्मी क्यों पड़ रही है? इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख में जियोस्पेशल साइंटिस्ट नित्यानंदम मौजूदा हालात के पीछे दो कारण बताते हैं. उनका मानना है कि रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के पीछे अल नीनो (El Niño) और ग्लोबल वार्मिंग जैसी बड़ी वजहें हैं .
अल नीनो का भारत पर क्या असर पड़ता है?
जानकारी के लिए बता दें कि अल नीनो मौसम से जुड़ी एक प्राकृतिक घटना है. दरअसल प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के पूर्वी हिस्से के पानी का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाने के कारण दुनिया भर के मौसम पैटर्न प्रभावित होते हैं. इस प्राकृतिक घटना को अल नीनो कहा जाता हैं. जानकारों का कहना है कि जिसतरह से मौसम का मिजाज बदल रहा हैं. इस साल मई से जुलाई के बीच अल नीनो की स्थिति मजबूत हो सकती है. भारत और आसपास के क्षेत्रों में हवा में नमी की कमी और मॉनसून से पहले की गर्मी लगातार बढ़ना इसके शुरुआती संकेत हैं. उधर मौसम विभाग (IMD) ने भी आशंका जताई है कि अल नीनो के कारण 2026 में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. गर्मी की दूसरी बड़ी वजह ग्लोबल वार्मिंग है. धरती का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर दिन प्रती दिन देखने को मिल रहा.
स्थानीय कारण भी बढ़ा रहे हैं गर्मी
हालांकि रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के लिए सिर्फ अल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग जैसी बड़ी वजहें ही काफी नहीं हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ स्थानीय कारण भी गर्मी को और ज्यादा खतरनाक बना रहे हैं. जैसे मेडिटरेनियन क्षेत्र से आने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर भारत में बारिश और ठंडक लाते हैं. लेकिन इस बार ये सिस्टम कमजोर पड़ गया, जिसका कारण हुआ की लंबे समय तक बारिश नहीं हुई और आसमान साफ रहने से तापमान बढ़ता गया. इसके साथ साथ एक तरफ जहां शहरों में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट जैसे, कंक्रीट, ऊंची इमारतें, गाड़ियां, एसी और इंडस्ट्रीज तापमान में बढ़ोतरी की बड़ी बजह है. वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में जंगलों की आग, लकड़ी और बायोमास जलाना, खुले बंजर मैदान और पेड़ों की कमी भी तापमान बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.
लू से हर साल हो रही हजारों मौतें
बढ़ते तापमान और गर्मी के दिनों में चलने वाली लू के कारण भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है. हालांकि इन मौतों का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के आंकड़ों में भारी अंतर देखने को मिलता है. लेकिन मीडिया रिपोर्ट और दूसरे सोर्स से मिली जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है. एक तरफ एनसीडीसी (NCDC) के अनुसार 2015 से 2020 के बीच 3812 लोगों की मौत लू से हुई तो आईएमडी (IMD) के आंकड़ों में यही संख्या 3635 बताई गई. वहीं एनसीआरबी (NCRB) के मुताबिक इस अवधि में केवल 767 मौतें दर्ज की गईं. इसलिए कई विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.
क्या है लू और हीटवेव से बचने का उपाय
लू और हीटवेव से निपटने के लिए कई कदम उठाया जा सकता हैं. लेकिन सबसे जरूरी है खुद सर्तक रहना. मीडिया और प्रशासन द्वारा किया जाने वाला जागरूक उपायों का पालन करना बेहद जरूरी है. मौसम विभाग पांच दिन पहले तक तापमान का अनुमान जारी करता है और येलो, ऑरेंज तथा रेड अलर्ट के जरिए लोगों को चेतावनी देता है. जिसके आधार पर ही घर से बाहर निकलने का प्लान बनाना चाहिए. इसके साथ साथ घर में रहें या बाहर सबसे जरूरी है पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं. दोपहर में बाहर निकलने से बचें, काम के दौरान आराम करें, सुबह या शाम के समय काम करें और मेडिकल सिस्टम को तैयार रखना होगा.