बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम भाजपा नेता Sushil Kumar Modi का सोमवार शाम दिल्ली एम्स में निधन हो गया। वह 72 साल के थे और लंबे समय से गले के कैंसर से कैंसर से पीड़ित थे। 3 महीने पहले गले में दर्द की शिकायत पर जांच के दौरान कैंसर का पता चलने के बाद दिल्ली एम्स में उनका इलाज चल रहा था। जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी कैंसर कि जानकारी
Sushil Kumar Modi ने कैंसर से पीड़ित होने की खबर 3 अप्रैल को सोशल मीडिया पर खुद पोस्ट शेयर कर दी थी। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा था- पिछले 6 महीने से कैंसर से संघर्ष कर रहा हूं। अब लगा कि लोगों को बताने का समय आ गया है। लोकसभा चुनाव में कुछ कर नहीं पाऊंगा। PM को सब कुछ बता दिया है। देश, बिहार और पार्टी का सदा आभार और सदैव समर्पित।
पिछले 6 माह से कैंसर से संघर्ष कर रहा हूँ । अब लगा कि लोगों को बताने का समय आ गया है । लोक सभा चुनाव में कुछ कर नहीं पाऊँगा ।
PM को सब कुछ बता दिया है ।
देश, बिहार और पार्टी का सदा आभार और सदैव समर्पित |— Sushil Kumar Modi (मोदी का परिवार ) (@SushilModi) April 3, 2024
बिहार के उप मुख्यमंत्री रहें Sushil Modi
सुशील मोदी बिहार में एनडीए की सरकार बनने के बाद 2005 से 2013 और फिर 2017 से 2020 तक बिहार के वित्त मंत्री रहें। इस दौरान वो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में डिप्टी CM भी रह चुके हैं। 2005 में पहली बार बिहार चुनाव में NDA सत्ता में आने के बाद उन्हें सदन में बिहार भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया। बाद में उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया और बिहार के उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।
दिल्ली कि राजनीति से दूरी
सुशील मोदी ने 1971 में छात्र राजनीति से राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की और फिर कॉलेज, यूनिवर्सिटी होते हुए पहले राज्य विधानसभा और फिर लोकसभा, विधानपरिषद अंत में राज्यसभा तक का सफर किया। देश के उन नेताओं में शामिल हुए जो चारों सदन का हिस्सा रहें। युवा नेता के रूप में अपनी पहचान बनाते हुए 1990 में विश्वविद्यालय से सीधे राज्य की राजनीति में उतर सुशील ने विधानसभा चुनाव लड़ा और जीतकर विधायक बने।
लगातार तीन बार विधायक रहें Sushil Modi
लगातार 3 बार पहले 1990, 1995 और फिर 2000 में Sushil Modi विधायक बने रहें। फिर राजनीति में इन्होंने पिछे मुड़कर नही देखा। सरकार नहीं बनने के कारण सुशील कुमार मोदी 1996 से 2004 तक बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता पद पर रहें। उसके बाद फिर 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर भागलपुर से सांसद बने। लेकिन दिल्ली की राजनीति में ज्यादा दिन नहीं रह सके।
पिछले महीने राज्यसभा में कार्यकाल खत्म
2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को जीत मिली और इन्होंने 2005 में संसद सदस्यता से इस्तीफा दे बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। उसके बाद वो विधान परिषद के लिए चुने गए। फिर 2005 से 2013 और 2017 से 2020 तक बिहार के वित्त मंत्री रहे। वर्ष 2020 में एनडीए की सरकार बनने के बाद भी राज्य कि राजनीति से दूर इन्हें राज्यसभा भेज दिया गया। पिछले महीने ही उनका राज्यसभा कार्यकाल भी खत्म हुआ।