सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ECI ने हलफनामे में कहा इसलिए नहीं जारी कर रहें आंकड़ें, जानिए क्या होता है फॉर्म 17C ?

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) से उस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है, जिसमें मौजूदा लोकसभा चुनाव 2024 के प्रत्येक चरण में मतदान की समाप्ति के बाद सभी मतदान केंद्रों द्वारा दर्ज किए गए वोटों का लेखा-जोखा तुरंत अपलोड करने का निर्देश देने की मांग की गई है। पोल पैनल ने बुधवार को शीर्ष अदालत को बताया कि उसकी वेबसाइट पर डाले गए वोटों का रिकॉर्ड (फॉर्म 17सी) अपलोड करने से शरारत हो सकती है। इसमें यह भी कहा गया कि वोटिंग डेटा ऑनलाइन अपलोड करने से मतदाताओं में भ्रम पैदा होगा क्योंकि इसमें डाक मतपत्रों की गिनती भी शामिल होगी।

ECI ने क्या कहा ?

वर्तमान लोकसभा चुनावों के लिए मतदाता मतदान के आंकड़ों को तत्काल प्रकाशित करने के लिए एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR)और कॉमन कॉज की याचिका का विरोध करते हुए, चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय को कहा कि फॉर्म 17c के आंकड़ों का अंधाधुंध खुलासा करने से मतगणना परिणामों सहित मतदान की छवियों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे व्यापक रूप से जनता में असुविधा होगी और चुनावी प्रक्रिया में लोगों में अविश्वास पैदा होगा।

ECI ने हलफनामे में क्या कहा गया ?

सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग को अपने 255 पन्नों के हलफनामे में बताया फिलहाल, मूल फॉर्म 17c केवल स्ट्रांग रूम में उपलब्ध है और इसकी एक प्रति केवल मतदान एजेंटों के पास है, जिनके हस्ताक्षर उस पर हैं। इसलिए, प्रत्येक फॉर्म 17c और उसके धारक के बीच एक-से-एक संबंध है। चुनाव आयोग ने इस बात पर भी जोर दिया कि नियमों के अनुसार फॉर्म 17c केवल मतदान एजेंट को ही दिया जाना चाहिए। चुनाव संबंधित नियम किसी अन्य संस्था को फॉर्म 17c के वितरण पर रोक लगाते हैं। नियमों में फॉर्म 17सी को आम जनता के सामने प्रकट करने का प्रावधान नहीं है। ECI ने हलफनामे में बताया कि फॉर्म 17c के संबंध में कानूनी व्यवस्था अजीब है कि यह मतदान एजेंट को फॉर्म 17सी की एक प्रति प्राप्त करने के लिए मतदान के अंत में अधिकृत करता है, लेकिन याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई प्रकृति का सामान्य खुलासा वैधानिक ढांचे में प्रदान नहीं किया जाता है। नियम किसी अन्य संस्था को फॉर्म 17c की प्रति देने की अनुमति भी नहीं देता हैं। याचिकाकर्ता का तर्क ऐसी स्थिति पैदा करता है जहां जनता का कोई भी सदस्य या मतदान केंद्र पर निर्वाचक इस तर्क पर फॉर्म 17c की एक प्रति की मांग कर सकता है कि यह एक सार्वजनिक दस्तावेज़ के चरित्र में शामिल है।

24 मई को सुप्रिम कोर्ट करेगा मामले की सुनवाई

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दावा किया है कि मौजूदा आम चुनाव 2024 में ECI ने आखिरी मतदान के कई दिनों के बाद मतदाता मतदान के आंकड़े प्रकाशित किए। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 19 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के आंकड़े 11 दिन बाद प्रकाशित किए गए, और 26 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के आंकड़े चार दिन बाद प्रकाशित किए गए। साथ ही, मतदान के दिन दिए गए पहले आंकड़ों से अंतिम मतदाता मतदान के आंकड़े 5% से अधिक भिन्न थे। इस मामले की सुनवाई छठे चरण के मतदान से एक दिन पहले 24 मई को सुप्रिम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा होनी है।

क्या होता है फॉर्म 17C ?

कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स 1961 के तहत कुल मतदाता और कुल वोटर्स का डेटा दो फॉर्म 17A और दूसरा 17C में दर्ज किया जाता है। मतदान के दिन किसी मतदाता को मत देने की अनुमति देने से पहले पोलिंग ऑफिसर फॉर्म 17A में मतदाता का इलेक्टोरल रोल नंबर दर्ज करता है, फिर बूथ पर पोलिंग बंद हो जाने के बाद फॉर्म 17C भरा जाता है। कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961 के नियम 49S के अनुसार पोलिंग बंद होने पर प्रीसाइडिंग ऑफिसर फॉर्म 17सी में दर्ज वोटों का लेखा-जोखा तैयार कर इन फॉर्म को एक अलग लिफाफे में रखता है। फॉर्म 17C में भी दो पार्ट होते हैं, पहले पार्ट में पोलिंग के दिन दर्ज वोटों का हिसाब होता है जबकि दूसरे पार्ट में गिनती का परिणाम होता है। फॉर्म 17C के पहले भाग को मतदान के दिन और दुसरा भाग मतगणना के दिन भरा जाता है। दायर याचिका में जिसकी मांग की गई है वो फॉर्म 17C के पहले भाग की जानकारी है। फॉर्म 17C पोलिंग स्टेशन का नाम और नंबर, मतदान के लिए इस्तेमाल होने वाले ईवीएम का आईडी नंबर, पोलिंग स्टेशन पर कुल वोटरों की संख्या, कितने लोगों को वोट नहीं करने दिया गया, प्रति वोटिंग मशीन में दर्ज वोट आदि जानकारियां होती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *