बिहार में विधानसभा चुनाव में अभी तारीखों का लंबा वक्त बाकी है। अगर मध्यावधि चुनाव नहीं होते है तो प्रदेश में अगले साल अक्टूबर- नवंबर में चुनाव होंगे। लेकिन सियासती गहमागहमी ऐसी है कि मानो कल ही चुनाव हो जाए। वर्तमान में नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार में NDA की सरकार है तो तेजस्वी यादव की अगुवाई में विपक्ष अपनी दावेदारी पेश कर रहा है। लोकसभा चुनाव में NDA की जीत और विपक्ष के बेहतर प्रदर्शन के बाद आगामी विधानसभा चुनाव और सियासती भविष्यवाणी के दौर शुरू हो चुकें है। इन भविष्यवाणी के बीच कई ऐसे भी सवाल भी है जो दोनों पक्षों के नेताओं के लिए परेशानी का सबब हो सकते हैं। लेकिन चुनावी तारीखों में एक लंबे का वक्त का होना इन राजनैतिक दलों के लिए राहत की सांस लेने जैसा हैं। खबर यह भी है कि सभी पार्टी अपने जुगाड़ में लग गई हैं, ऐसे में बिहार विधानसभा के लिए 2025 का चुनाव मजेदार होने वाला है।
किन चेहरों पर दांव लगाएगी NDA गठबंधन
राज्य में पिछले कई चुनाव के समीकरण बताते है कि नीतीश जिधर रहते है, जनता का झुकाव उधर रहता है। नीतीश के दो बार पाला बदल अलग अलग खेमे में जाने के बाद हुए चुनाव परिणाम में ऐसे ही संकेत है। 2015 के चुनाव में नीतीश महागठबंधन खेमे में रहे तो जीत महागठबंधन की हुई और फिर जब 2020 के चुनाव में एनडीए के सहयोगी बने तो जनता ने एनडीए के पक्ष में अपना जनमत दी। इसलिए नीतीश दोनों खेमे के लिए जरूरी है। हालांकि नीतीश के पाला बदलने से नुकसान जदयू का हुआ जो पहले नंबर तीसरे नंबर की पार्टी बन गई। अपने सहयोगियों के दम पर राज्य में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद भी बीजेपी राज्य में अपनी जमीन तलाश रही है तो गठबंधन के अन्य दलों के बड़े चेहरे अब केंद्रीय भूमिका है। राज्य में बीजेपी के बड़े चेहर पर जनता का भरोसा उतना नहीं दिखता जितना की पार्टी इन बड़े नेताओं से उम्मीद करती है। इसके साथ साथ जातीवाद और समाजवाद की रणनीति को भुनाने में भी बीजेपी बिफल रही है। हालांकि पार्टी अपने फैसलों से शॉक करती रही है तो कुछ भी कहना या मान लेना जल्दबाजी होगी, इसलिए भी अभी इंतजार करना चाहिए। लेकिन फिलहाल एनडीए में नीतीश के अलावा कोई और बड़ा चेहरा नहीं दिखता है जो नतीजों का खेल पलट सके।
बिहार में सीटों का नया समीकरण
लोकसभा में सीटों के हिसाब से सबसे बड़े राज्यों में से एक बिहार में कुल 40 संसदीय निर्वाचन क्षेत्र है। 2024 के आम चुनाव में जहां एक बार फिर से एनडीए ने राज्य में बेहतरीन प्रदर्शन किया, वहीं राज्य में पिछले चुनावों की तुलना में INDIA का प्रदर्शन भी बेहतर हुआ। सीटों के हिसाब से एनडीए 30 सीटों पर सफल रही वहीं विपक्ष और अन्य के खाते में 10 सीटें आई। आम चुनाव के नतीजों के बाद अब पार्टियों की नजर आगामी विधानसभा चुनाव है। जिसके लिए अगले साल अक्टूबर- नवंबर में राज्य के 243 सीटों पर चुनाव होने है। चालू कार्यकाल में राज्य में एनडीए की सरकार है। सीटों के हिसाब से राज्य विधान सभा में अभी 7 सीटें रिक्त है जिसपर उप चुनाव होने है। जबकि 78 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, 77 सीटों के साथ आरजेडी दूसरे नंबर की पार्टी है और 44 सीटों के साथ जदयू तीसरे नंबर की पार्टी है। एक तरफ जहां एनडीए अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहेगी वही दूसरे तरफ विपक्ष भी सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी।
किस करवट बैठेगा NDA का ऊंट
बार बार पाला बदलते नीतीश कुमार की प्रासंगिकता और विश्वनीयता पर उठ रहे सवालों का जवाब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में परिणाम के जरीय दे दी। जनता का पार्टी के पक्ष में झुकाव यह साबित करता है कि नीतीश अभी भी राज्य में पूरी तरह से प्रासंगिक है। विधान सभा चुनाव 2020 में 45 सीटों के साथ तीसरे नंबर की पार्टी रही जदयू के लिए अपने प्रदर्शन को बेहतरीन करने के लिए अपने रणनीति पर मंथन करना करना होगा। राज्य विधानमंडल में पार्टी के सबसे विश्वनीय नेताओं का केंद्रीय भूमिका में होना पार्टी के लिए मुश्किल हो सकता है। लेकिन हालिया प्रदर्शन से उत्साह से भरी पार्टी को एक बार फिर से विधानसभा चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद होगी।
क्या बड़े प्रयोग से बचेगी बीजेपी ?
लोकसभा चुनाव परिणाम के अनुसार राज्य में भी हिन्दी पट्टी के अन्य राज्यों की भांति बीजेपी को सीटों और वोटों का नुकसान हुआ है। पार्टी के जीते हुए सांसदों का जीत का अंतर भी सामान्य है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी नेताओं के तेवर बदले हुए दिख रहें है। राज्य में पार्टी के पास एक मजबूत चेहरा का ना होने का नुकसान भी पार्टी पर भारी पद सकती है। जैसा की पिछले कुछ चुनाव में देखने को मिला है। ऐसे में बीजेपी राज्य में फिलहाल किसी बड़े प्रयोग के मूड में नहीं दिख रही हैं। लोकसभा चुनाव में जदयू का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। जिसके बाद बिहार बीजेपी के शीर्ष नेतृव और केंद्रीय नेतृत्व द्वारा विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की अगुवाई में ही चुनवा लड़ने की बात कह चुकी है। लेकिन पार्टी के बड़े चेहरे पार्टी नेतृत्व के इस फैसले से अलग राय रखते है। अपने विचारों के साथ ये नेता मीडिया में अपना पक्ष भी रख चुके हैं।
NDA में छोटी पार्टी बड़ी चुनौती ?
विधानसभा चुनाव 2020 में नीतीश कुमार की वजह से एनडीए से अलग चुनाव लड़ने वाले चिराग पासवान इस बार किधर जाते हैं यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा है। हालांकि चिराग ने अभी तक अपने फैसले को लेकर कुछ खासा संकेत नहीं दिए है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि वो इस बार एनडीए की सहयोगी के तौर पर नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनावी मैदान में उतरेंगे। लोकसभा में चिराग पासवान की पार्टी ने सभी सीटों 5 पर सफलता पाई है। मोदी कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद जीतनराम माझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) का कद राज्य में बड़ा हो गया है। फिलहाल पार्टी से तीन विधायक विधानसभा में है। जो गठबंधन के गठजोड़ में पार्टी अपनी दावेदारी मजबूत करने का प्रयास करेगी । ऐसे में NDA का ऊंट किस करवट बैठता है यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा।