Digital attendance : शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी पर योगी सरकार का एक्शन, नहीं लगाया अटेंडेंस तो सैलरी कटेगी और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने शिक्षकों की Digital attendance पर सख्त रुख अपनाते हुए हाजिरी न लगाने वालों का वेतन रोकने और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है। जारी आदेश के मुताबिक लगातार तीन दिन तक ऑनलाइन हाजिरी न लगाने वालों का वेतन रोक दिया जाएगा। डिजिटल हाजिरी पर विभागीय निर्देशों का पालन न करना उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्नाव में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने आदेश जारी कर कहा है कि तीन दिन तक डिजिटल हाजिरी न लगाने पर विभागीय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके चलते अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और ऐसे शिक्षकों का वेतन-भत्ते अगले आदेश तक रोक दिए जाएंगे।

Digital attendance को लेकर काली पट्टी बांधकर शिक्षकों का विरोध

इससे पहले राज्य सरकार ने 11 जुलाई से शिक्षकों के लिए Digital attendance अनिवार्य कर दी थी। इस कदम का शिक्षकों ने विरोध किया है और कई संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों ने सरकार के आदेश को अव्यवहारिक बताया है। यूपी के कई जिलों में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। कई शिक्षक संगठनों ने जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपे हैं। आदेश लागू होने के पहले दिन यानी आठ जुलाई को उन्नाव और बाराबंकी में मात्र दो फीसदी शिक्षकों ने डिजिटल हाजिरी लगाई। उन्नाव-बाराबंकी के बीईओ ने ऐसे शिक्षकों का वेतन या भत्ता रोकने की संस्तुति की है।

इस व्यवस्था के जरिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने का प्रयास : सरकार

Digital attendance को लेकर आज शिक्षकों के विरोध को देखते हुए शुक्रवार को सभी क्षेत्र शिक्षा अधिकारियों और शिक्षा समन्वयकों की बैठक बुलाई गई। बैठक के नतीजों के आधार पर विभाग अगले कदम पर फैसला लेगा। प्रदेश सरकार इस कदम के जरिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने का प्रयास कर रही है। शिक्षकों और कर्मचारियों को रोजाना डिजिटल हाजिरी लगाने और किसी भी तरह की लापरवाही से बचने के आदेश जारी किए गए हैं। माना जा रहा है कि इस तरह के सख्त कदमों से अनुशासन आएगा और शिक्षा क्षेत्र की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा, जिससे सकारात्मक बदलाव आएंगे।

Digital attendance पर राजनीति जारी

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ने ही सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत ने कहा कि शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति की निगरानी करने के बजाय उच्च अधिकारियों, बीईओ और सचिवों से ऑनलाइन जांच कर अनियमितताओं की पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को सबसे पहले स्कूलों की हालत सुधारनी चाहिए, जहां कभी बच्चों से घास कटवाई जाती है तो कभी मध्याह्न भोजन के नाम पर भ्रष्टाचार किया जाता है। यह मनमानी है। शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति को लेकर उठे विवाद के बीच मीनाक्षी बहादुर जैसी शिक्षाविदों और प्राथमिक शिक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि डिजिटल उपस्थिति शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए फायदेमंद है।

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