Rupauli Bypoll Bihar : JDU और  RJD के नाक की लड़ाई में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत, जानिए कौन हैं शंकर सिंह

पटना। बिहार के रुपौली विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव (Rupauli Bypoll Bihar) में निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह ने करीब 8 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। विधानसभा के इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार और पांच बार विधायक रह चुकी बीमा भारती और जनता दल यूनाइटेड ने कलाधर मंडल और निर्दलीय शंकर सिंह के बीच मुख्य मुकाबला था। लेकिन मतगणना के बाद शंकर सिंह ने 8 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की है। विधानसभा की इस सीट पर  10 जुलाई को उपचुनाव हुए थे।

Rupauli Bypoll Bihar:आरजेडी और जदयू के लिए नाक की लड़ाई

लोकसभा चुनाव के बाद  सात राज्यों में 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव सबसे चौंकाने वाला परिणाम बिहार की रुपौली सीट का रहा जहां जदयू और आरजेडी की लड़ाई में निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह बाजी मारी। इस सीट से जेडीयू ने  कलाधर मंडल को और आरजेडी ने  बीमा भारती को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन दोनों में से किसी को भी जीत नहीं मिली। मालूम हो कि बीमा भारती ही इस सीट से पहले जेडीयू की विधायक थी लेकिन बाद में वो पाला बदल कर आरजेडी में शामिल हो गईं। जिससे यह सीट खाली हो गया।  आरजेडी ने बीमा भारती को लोकसभा चुनाव में पूर्णिया से टिकट दिया था। लेकिन भारती को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लड़ा चुनाव

उप चुनाव में NDA और INDIA की लड़ाई में फतह हासिल  करने वाले शंकर सिंह की जीत  काफी मायनों में महत्वपूर्ण है। विधानसभा की इस सीट से जीतने के लिए जदयू और आरजेडी के बड़े नेताओं ने प्रचार प्रसार में काफी जोड़ लगाया और अपने उम्मीदवारों के लिए जनता का समर्थन मांगा, लेकिन ठीक इसके विपरीत निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले शंकर सिंह को उनके पार्टी का भी समर्थन नहीं मिला। अपने कार्यकर्ता और समर्थकों के बदौलत उन्होंने अपनी जीत सुनश्चित कर ली। 2005 के विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर रूपौली विधानसभा सीट से  ही उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। फिर 2005 में चुनाव जितने के बाद  2010, 2015 और 2020 में भी रुपौली से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

नॉर्थ बिहार लिबरेशन आर्मी के कमांडर रहे शंकर सिंह

उससे पहले शंकर सिंह नॉर्थ बिहार लिबरेशन आर्मी के कमांडर रहे हैं। इस संगठन का उत्तरी बिहार ठीक-ठाक असर रहा है। 2000 में संगठन के  संस्थापक बूटन सिंह की पूर्णिया में हत्या  हो गई। जिसके बाद शंकर सिंह ने ही इसकी कमान संभाली।  संगठन को राजपूत मिलिशिया की उपमा दी जाती थी। कमांडर बनने के बाद शंकर ने लोगों को डराने-धमकाने का काम करते थे। उस दौरान शंकर सिंह पर बूथ कैप्चरिंग करने के आरोप भी लगे थे।

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