अनुसूचित जाति सूची में बदलाव के फैसले पर नीतीश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, SC की लिस्ट से बाहर होगी ये जाति

पटना। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में अनुसूचित जाति (SC) की सूची से तांती-तत्वन को हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि हालांकि वह तांती-तत्वन समुदाय के उन लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा नहीं करता है, जिन्होंने एससी दर्जे के तहत नौकरी हासिल की है, लेकिन राज्य सरकार को ऐसे कर्मचारियों को उनके पिछले आरक्षण श्रेणी यानी अत्यंत पिछड़ा वर्ग EBC) कोटे के तहत समायोजित करना चाहिए। इस कदम का उद्देश्य अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों के साथ आगामी रिक्तियों को भरना है।

2015 की अधिसूचना भी रद्द

इससे पहले, बिहार पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर, राज्य सरकार ने तांती-तत्वन को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया था, एक निर्णय जिसे 2017 में पटना उच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं में चुनौती दी गई थी और खारिज कर दिया गया था। (Bihar ki Khbren)डॉ. भीमराव अंबेडकर फोरम और आशीष रजक ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस विक्रम नाथ और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने सोमवार को राज्य सरकार के फैसले को गलत माना और इसे रद्द करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की 2015 की अधिसूचना को भी रद्द कर दिया है जिसके जरिए तांती-तत्वन को SC सूची में शामिल किया गया था। कोर्ट ने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं।

SC सूची में बदलाव करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर : कोर्ट

पीठ ने इस मामले में पटना हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखने पर भी प्रतिकूल टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अनुसूचित जाति सूची में बदलाव करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और यह केवल संसद द्वारा ही किया जा सकता है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश को स्वीकार करना राज्य सरकार के लिए अनिवार्य हो सकता है। इससे आयोग को किसी भी संवैधानिक प्रावधान में किसी भी जाति को अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने की सिफारिश करने का अधिकार नहीं मिलता।

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