ओलंपिक गोल्ड पर भारी परा 100 ग्राम का भार, आखिरी 12 घंटों में किस्मत ने विनेश को दिया पटखनी

संपादकीय डेस्क।….तो चलिए हम भी ट्रेंड में शामिल हो जाते हैं। दुर्भाग्यवस भारत ने ओलंपिक में अपना एक मेडल गंवा दिया। मीडिया रिपोर्ट्स और ट्रोलिंग सेना की बातों से इतर भारत को यह हार खेल अनुशासन के बदले में मिली है, जैसा कि पहले खेले जा चुके कई खेलों में इन्हीं अनुशासन के बदले भारत को जीत भी मिली थी। आपके राजनीतिक महत्वाकांक्षा और वैचारिक तर्क के अनुसार भले ही,ओलंपिक में भारतीय महिला पहलवान के साथ हुई दुखद घटना आपको सास बहु और साजिश वाली लग रही हो मगर हकीकत यह है कि जो कुछ हुआ है नियम और कानून के तहत हुई है। नियम संवेदना और संघर्ष भावनाओं से उपर होते हैं। क्योंकि यही एक ऐसी चीज है जो किसी दो के बीच के अंतर को रेखांकित करती है।

इससे पहले भी पेरिस ओलंपिक को लेकर कई विवाद खबरों की सुर्खियां बनी। लेकिन पर्याप्त तर्कों के बावजूद मुद्दों ने सबूत के अभाव में दम तोड़ दिए। अब उदाहरण से समझें तो… महिला 68 किलोग्राम कैटेगरी के क्वार्टरफाइनल में निशा दहिया वाला पहलवानी मुकाबला, उससे पहले मुक्केबाजी में अल्जीरिया की महिला बॉक्सर ईमान ख़लीफ़ पर लिंग भेद को लेकर लगाए गए आरोप, भारत और ब्रिटेन के बीच हॉकी क्वार्टरफाइनल मुकाबला आदि कुछ मैच हैं जो विवादों में हैं।

ऐसे में जब एक दिन पहले जब दुनियां के बड़े धुरंधरों को मैट पर पानी पिलाने वाली विनेश फोगाट अयोग्य करार देते हुए ओलंपिक के फाइनल मैच से पहले बाहर कर दी गई, तो एक बार फिर से साजिश शब्द कीवर्ड बन गया। महिला पहलवानी के 50 किलोग्राम कैटेगरी के फाइनल में जगह बनाने पर जो भीड़ फोगाट के उपलब्धियों को सर पर चढ़ा सरकार पर सवाल खड़े कर रही थी। उन्होंने एक दम से वक्त बदल दिए, जज़्बात बदल दिए। भीड़ सरकार से उम्मीद करने लगी कि अपनी वैश्विक लोकप्रियता को मोहरा बना भारतीय प्रधानमंत्री ओलंपिक खेलों के नियमों में बदलाव करवाएं । पहले प्रधानमंत्री का सोशल मीडिया पोस्ट और फिर खबरों में भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष से फोन पर बात करने वाली खबर ने लोगों के दिलासा भी दिया। जो खबरों तक ही सीमित रह गई। लेकिन हकीकत है कि खेल के नियम होते है। जो सभी के लिए बराबर और एक समान होते हैं। अब इसमें ना तो पीटी उषा कुछ कर सकती है, ना ही मोदी जी और हाँ नीता अम्बानी भी कुछ नही कर सकती।

अब इस खबर की असली पहलू को समझते हैं। दरअसल पेरिस ओलंपिक से पहले विनेश फोगाट महिला पहलवानी के 53 किलोग्राम कैटेगरी में खेलती रही हैं। ओलंपिक खेलों की बात करें तो रियो ओलंपिक-2016 में उन्होंने 48 किलोग्राम कैटेगरी, टोक्यो ओलंपिक-2020 में वो 53 किलोग्राम कैटेगरी और अब पेरिस ओलंपिक में आकर उन्होंने 50 किलोग्राम कैटेगरी में पहलवानी करना चुना। उनके इस फैसले के पीछे कई वजह हो सकते हैं। लेकिन मुख्य रूप से कहा जाता है कि पिछले करीब 1 साल से अधिक समय से चल रहें महिला पहलवानों और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के बीच विवादों को लेकर फोगाट मासिक और शारीरक रूप से अपने सामान्य कैटेगरी में खेलने को तैयार नही थीं। इसके साथ साथ 53 किलोग्राम कैटेगरी में दुनियां के बेहतरीन पहलवान कुश्ती खेलते हैं। ऐसे में अधूरी तैयारी उनके लिए ओलंपिक में भारी पड़ सकता था। इसलिए फोगाट ने 50 किलोग्राम कैटेगरी में खेलना चुना। जिसको लेकर काफ़ी विवाद भी हुए। 50 किलोग्राम कैटेगरी में ओलंपिक में भाग ले रही विनेश का 57 किलो वेट रेंज में आती है। इसलिए वो सामान्य तौर पर 53 किलो फ्री स्टाइल खेलती है। अब जब ओलंपिक में भाग लेने विनेश पेरिस आती हैं तो क्वालीफायर खेलने से पहले उनका वेट 49.9 किलो था। जिसे वो मैनेज कर ले गई। फिर सेमीफाइनल खत्म होते होते उनका वजन बढ़कर 52.7 किलो हो गया। इस बढ़ोतरी के पीछे वजह यह रही कि फाइट के दौरान उन्होंने जो ताकत के लिए खुराक ली थी। जो ताकत के साथ साथ वेट भी बढ़ा गए।

2020 के ओलंपिक के बाद अब यह नियम है कि एक दिन में ही क्वालीफायर से सेमीफाइनल तक के मुकाबले खेल लिए जाते हैं फिर उसके अगले दिन फाइनल होता हैं। इसलिए पहले दिन क्वालीफायर से सेमीफाइनल तक का मुकाबला हो रहा था। विनेश 49.9 किलो भार के साथ 50 किलोग्राम कैटेगरी में पहलवानी के फिट बैठ रही थीं । लेकिन इस दौरान उनके द्वारा ली गई खुराक और बढ़ते पायदान के बीच मेडल जीतने के प्रेसर से बढ़ रही नर्वसनेस ने विनेश के भार को बढ़ा कर 52.7 किलो कर दिया। भार के अंतर्गत आने वाली सभी खेलों में खेलने वाले खिलाड़ियों के साथ होने वाली यह सामान्य घटना है। खैर मुद्दे पर आते हैं। निर्धारित भार से 2.7 किलो ग्राम अधिक भार को कम करने के लिए विनेश के पास करीब 12 घंटे का समय था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विनेश और उसके सपोर्ट स्टाफ ने वो सबकुछ किया जो किया जा सकता था. बाल कटवाए, साइकलिंग की, रस्सी कूदी, सोना बाथ लिया, यहाँ तक कि उन्होंने ब्लड रिलीज भी किये लेकिन बात नहीं बनी और 100 ग्राम के अतरिक्त भार के कारण वो डिसक्वालीफाई हो गई। यह उनके साथ हुई पहली घटना नही थी। वो इससे पहले भी भार में बढ़ोतरी के कारण अयोग्य करार दी जा चुकीं हैं।

किसी भी खेल या खिलाड़ी के लिए यह दुर्भाग्य पूर्ण है जो एक बार फिर भारत के हिस्से आया है। 140 करोड़ लोगों के लिए यह दिल तोड़ने वाला है। लेकिन हमें नही भूलना चाहिए हमारी लड़की चैम्पियन है। जिसने पहले सीस्टम और फिर खेलों में अपने पतिद्वंदी को पटखनी दी है। महज कुछ ग्राम के अतिरिक्त भार के कारण उसका पिछड़ जाना, बुरा तो लगता है। लेकिन वक्त पहलवान के हौसला अफजाई का है। मुद्दों पर राजनीति और दिखावटी दंगल का नहीं हैं। विनेश मेडल के लिए जो कुछ कर सकती थी उसने किया, लेकिन शायद दिन उसका नही था। उसने मेडल नही करोड़ों लोगों का दिल जीता है। जो शायद मेडल से ज्यादा कीमती है।

लेकिन इस बड़ी खबर ने कुछ संकेत भी दिए। इन संकेतों को शब्दों का स्वरूप देने के लिए मैं उपयुक्त नहीं हूँ। मुझे इतनी जानकारी नहीं है जिससे इस तथाकथित विकसित समाज और लोगों के सोच को प्रदर्शित करती हैं। उन्हें मानव होने पर विचार करना चाहिए…..

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