Bihar Temple : बिहार का यह प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर है पर्यटकों की पहली पसंद, पितृ पक्ष में दर्शन करना माना जाता है शुभ

पटना। बिहार प्राचीन काल से धर्म और अध्यात्म का केंद्र रहा है। जिसके प्रमाण आधुनिक काल में भी देखने को खूब मिलते हैं। उदाहरण के लिए आप राज्य के गया जिले में स्थित Vishnupad Temple को ही ले लीजिए। पौराणिक ग्रंथों में वर्णित यह मंदिर आज भी अपनी भव्यता और वैभवता के लिए प्रसिद्ध है।

पौराणिक काल में मिलता है मंदिर का जिक्र

विष्णुपद मंदिर गया जिले में मोक्षदायिनी फल्गु नदी के तट पर स्थित है। रामायण काल के इस दौरान उल्लेखित इस मंदिर के वर्तमान संरचना का निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्या बाई ने करवाया था। लगभग सौ फीट ऊंचें इस मंदिर का निर्माण कसौटी नामक एक विशेष पत्थर से किया गया है। खास बात यह है कि यह पथर जिले के अत्रि ब्लॉक के पत्थर काटने वालों से ही प्राप्त किया गया था। मंदिर में 44 स्तंभों वाला एक सभा मंडप है। बाहर से मंदिर की भव्यता जितना विशाल दिखता है अंदर उतनी ही शांति हैं।

कैसे पड़ा Vishnupad Temple का नाम

जैसा कि नाम के अर्थ से मालूम होत हैं, गया का यह Vishnupad Temple अपने 40 सेमी लंबे पदचिह्न के लिए प्रसिद्ध है। इसमें शंख, चक्र और गदा सहित नौ प्रतीकों से सुशोभित है। कहा जाता है कि ये प्रतीक भगवान विष्णु के दिव्य अस्त्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। विष्णुपद को धर्म शिला के रूप में भी जाना जाता है। इसे एक ठोस चट्टान पर उकेरा गया है और चांदी से सजाया गया है। पदचिह्न लाल चंदन से सजाया गया है, और इस पर गदा, चक्र और शंख के प्रतीक अंकित हैं। मंदिर का अष्टकोणीय आकार इसकी भव्यता और आकर्षण को और बढ़ा देता है।

क्या है मान्यता

जानकार लोग बताते है कि शहर गया का नाम राक्षस गया सुर के नाम पर रखा गया है। गया सुर ने एक यज्ञ किया था। जिसके बाद उसने वरदान मांगा कि जो कोई भी उसे देखेगा उसे मुक्ति मिल जाएगी। उसके गलत कामों के बावजूद, लोग उसे देखने मात्र से मुक्ति पाने लगे। जिससे उसका अंहकार बढ़ गया। फिर उसे हराने और मानवता को बचाने के लिए सर्वशक्तिमान भगवान उसके सामने प्रकट हुए और उसे पाताल लोक जाने का निर्देश दिया। जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपना दाहिना पैर गया सुर के सिर पर रखा और दूसरा पैर चट्टान पर रखा। भगवान के पैरों के भार के चलते गया सुर पताल में धस गया। भगवान का जोड़ इतना मजबूत था की जिस चट्टान पर उन्होंने अपना दूसरा पैर रखा था। उस उनके पैरों के निशान पड़ गए। ये पैरों के निशान आज भी दिखाई देते हैं।

पर्यटकों की पसंद है Vishnupad Temple

गया में पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में Vishnupad Temple में भगवान पैरों के दर्शन को श्रद्धालु आते हैं। स्थानीय लोग बताते है कि ऐसा माना जाता है कि पूर्वजों के लिए अनुष्ठान करने के बाद, इस मंदिर में भगवान विष्णु के पैरों के निशान देखने से सभी दुख दूर हो जाते हैं और पूर्वजों को स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है। मंदिर परिसर के भीतर, भगवान नरसिंह और भगवान शिव के अवतार फल्गीश्वर को समर्पित कई छोटे मंदिर हैं। यह मंदिर हिंदुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। पितृ पक्ष में इस मंदिर में तो भीड़ रहती ही हैं, लेकिन उसके बाद वर्ष भर यहाँ भक्तों का आना जाना लगा रहा हैं। गया आने वाले देश और विदेश के भक्तों और पर्यटकों के बीच यह काफी लोकप्रिय है। यहाँ आना लोगों की पहली प्राथमिकता होती हैं।

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