Dhanteras जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, हर साल दिवाली से पहले मनाया जाता है. यह पर्व पांच दिवसीय दिवाली उत्सव का पहला दिन होता है, जो कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष के तेरहवें दिन आता है. इस वर्ष धनतेरस का पर्व मंगलवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इस दिन विशेष रूप से सोने-चांदी, बर्तन और झाड़ू की खरीदारी को शुभ माना जाता है, क्योंकि यह देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर के स्वागत का प्रतीक है.
धनतेरस का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
धनतेरस के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:00 बजे से 8:49 बजे तक है, जो प्रदोष काल के दौरान आता है. इसी समय वृषभ काल भी रहेगा, जो पूजा के लिए उत्तम माना जाता है. त्रयोदशी तिथि 29 अक्टूबर को सुबह 1:01 बजे से शुरू होकर 30 अक्टूबर को सुबह 3:45 बजे समाप्त होगी.
Dhanteras का महत्व
धनतेरस का पर्व देवी लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक है, जो घरों में सुख-समृद्धि लाने का विश्वास रखती हैं. साथ ही, भगवान कुबेर की पूजा करने का उद्देश्य धन की सुरक्षा और वृद्धि करना है. इस दिन का महत्व इस बात में भी है कि यह घर और मन को पवित्र करने का समय माना जाता है, जिससे जीवन में शुभता और सकारात्मकता का संचार होता है.
किन वस्तुओं की करें खरीदारी
धनतेरस, जिसे धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, हर साल दिवाली से पहले मनाया जाता है. इस दिन खरीदी गई वस्तुओं को शुभ और कल्याणकारी माना जाता है. यहाँ कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें खरीदना धनतेरस पर विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है:
- सोने और चांदी के सिक्के – देवी लक्ष्मी और गणेश की छवि वाले सिक्के शुभ माने जाते हैं और पूजा में उपयोग किए जा सकते हैं.
- सोने/चांदी के आभूषण – यह निवेश और समृद्धि का प्रतीक है. विवाह समारोहों में उपयोग होने के अलावा ये पारिवारिक विरासत बन सकते हैं.
- भगवान की मूर्तियाँ – देवी लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियाँ घर लाना शुभ होता है. इससे घर में आध्यात्मिकता का माहौल बनता है.
- बर्तन – बर्तन खरीदने से घर में नएपन की भावना आती है और यह देवी लक्ष्मी के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है.
- झाड़ू – यह सफाई और सकारात्मकता का प्रतीक है. घर में नई झाड़ू लाने से नकारात्मकता दूर होती है.
धनतेरस की ये खरीदारी न केवल संपत्ति बढ़ाने के लिए मानी जाती है, बल्कि यह आध्यात्मिक आशीर्वाद और समृद्धि का भी प्रतीक है.