पटना। जननायक और पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर(birth anniversary of Karpuri Thakur) की 101वीं जयंती का आयोजन इस बार विशेष होगा. 24 जनवरी को आयोजित इस समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, बिहार के राज्यपाल अली मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शिरकत करेंगे.
कार्यक्रम स्थल चरण कर्पूरी फुलेश्वरी महाविद्यालय परिसर में आयोजित मुख्य समारोह में सर्वधर्म प्रार्थना और कर्पूरी परिचर्चा का आयोजन किया गया है. उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री यहां करीब एक घंटे तक समय बिताएंगे.
Karpuri Thakur : पहली बार उपराष्ट्रपति की उपस्थिति
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री और कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर ने बताया कि कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न मिलने के बाद यह पहली जयंती है और इस बार उपराष्ट्रपति की उपस्थिति इसे ऐतिहासिक बना देगी. यह पहला अवसर होगा जब कर्पूरी जयंती में उपराष्ट्रपति भाग लेंगे.
भव्य तैयारियां और मुख्य आयोजन स्थल
कार्यक्रम के लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. तीनों अतिथियों के लिए अलग-अलग हेलीपैड का निर्माण कराया गया है. मुख्य कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था की विशेष तैयारियां की जा रही हैं.
कार्यक्रम में तीनों अतिथि कर्पूरी प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे और परिचर्चा में भाग लेंगे. कर्पूरी ठाकुर के सादगीपूर्ण जीवन को दर्शाने के लिए उनके पूर्व आवास की झोपड़ी को प्रतीकात्मक रूप से महाविद्यालय परिसर में पुनर्निर्मित किया जा रहा है.
Karpuri Thakur: झोपड़ी का पुनर्निर्माण
कर्पूरी ठाकुर(birth anniversary of Karpuri Thakur) का जीवन झोपड़ी में गुजरा था. उनकी सादगी को दिखाने के लिए वैसी ही झोपड़ी का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें आटा पीसने वाला जातां, कच्ची नाली, और साधारण दरवाजा प्रतीकात्मक रूप से शामिल होंगे. इस झोपड़ी को देखने के लिए उपराष्ट्रपति समेत सभी अतिथि पहुंचेंगे.
झोपड़ी निर्माण का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि मुख्यमंत्री रहते हुए भी कर्पूरी ठाकुर ने सादगी भरा जीवन जिया और घर बनाने की जगह झोपड़ी में ही रहना पसंद किया. उनकी पुरानी झोपड़ी के स्थान पर अब कर्पूरी स्मृति भवन बन चुका है.
तैयारियों का निरीक्षण
सदर एसडीओ दिलीप कुमार ने कार्यक्रम (birth anniversary of Karpuri Thakur)स्थल का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्य अतिथियों की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन में कोई कमी न हो. उनके रूट चार्ट को भी अंतिम रूप दिया गया.
कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर इस बार के आयोजन को उनकी विरासत और सादगी को सम्मान देने के तौर पर देखा जा रहा है.