Congress Padayatra : देश के बाद अब बिहार में कांग्रेस की राजनीतिक यात्रा,जानें क्या है मायने

Congress Padayatra : हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में मिली हार के सिलसिले को खत्म करने के लिए कांग्रेस की नजर बिहार पर है. जहां पार्टी अपनी हार पर विराम लगाना चाहेगी…राज्य में राजद की बैसाखी के सहारे सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने की कोशिश कर रही कांग्रेस अब अपनी जमीन टटोल रही है. इस कड़ी में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, बिहार में कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक जड़ें मजबूत करने के लिए राज्यव्यापी पदयात्रा की शुरुआत की है. पलायन रोको, नौकरी दो के थीम पर शुरू हुई इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य बिहार के लाखों युवाओं को बेरोजगारी के संकट के कारण पलायन करने पर मजबूर करने वाले मुद्दों को उजागर करना है.
पश्चिम चंपारण के भितिहरवा से शुरू हुई कांग्रेस की पदयात्रा

पार्टी के वरिष्ठ नेता, AICC बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, राज्य कांग्रेस प्रमुख अखिलेश प्रसाद सिंह और कन्हैया कुमार इस पदयात्रा (Congress Padayatra ) में हिस्सा ले रहे हैं. यह यात्रा महात्मा गांधी के ऐतिहासिक आश्रम स्थल, पश्चिम चंपारण के भितिहरवा से शुरू हुई, जहां से पार्टी के युवा और छात्र स्वयंसेवक इस यात्रा के तहत कई जिलों को कवर करते हुए पटना पहुंचेंगे.

बिहार में सिर्फ पलायन

कन्हैया कुमार ने आगे आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक राजनीति का सहारा लिया जा रहा है. कुमार ने कहा कि राज्य में हर परीक्षा लीक हो जाती है, और जो सरकारी नौकरी पाने में सफल होते हैं, उन्हें पेंशन के लाभ नहीं मिल पाते. यह विफलता राज्य की रोजगार नीतियों की सच्चाई है. जब सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार देने में विफल रहती है, तो समाज में विभाजन और सांप्रदायिक तनाव बढ़ता है.

उसने यह भी कहा कि यहां के लोग बिहार सिर्फ नौकरी के लिए नहीं छोड़ते, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और यहां तक कि हनीमून के लिए भी छोड़ते है. कन्हैया कुमार ने जब पूछा गया कि क्या वह आगामी विधानसभा चुनावों में भाग लेंगे, तो उन्होंने इसका सीधा जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता रोजगार है, राजनीति नहीं.

Congress Padayatra : क्या है राजनीतिक मायने

कांग्रेस की यह पदयात्रा युवा केंद्रित राजनीति को बढ़ावा दे रही है. जिसके आधार पर पार्टी  आगामी विधानसभा चुनावों में राजद और वाम दलों के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर विचार करेंगी. पार्टी इस यात्रा के जरिए राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है. अब यह देखना होगा कि बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे पर आधारित यह रणनीति आगामी चुनावों में कितना प्रभावी साबित होती है. क्या यह पदयात्रा कांग्रेस के लिए एक नया मोड़ लाएगी? इसका जवाब बिहार के मतदाता ही देंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *