बेटे को विरासत सौंपने की तैयारी कर रहे हैं नीतीश कुमार ! पिता के राजनीतिक नक्शे पर कितने फिट बैठेंगे निशांत…?

पटना। परिवारवाद  की राजनीति के विरोधी माने जाने वाले और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, क्या अब अपने बेटे निशांत कुमार(nishant kumar) को राजनीति में लाने की तैयारी कर रहे हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि ऐसे कई संकेत मिल रहे हैं जो इस अटकल को मजबूत कर रहे हैं. नीतीश कुमार ने वर्षों तक अपने पुराने साथी और राजनीतिक विरोधी लालू प्रसाद यादव पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं, लेकिन अब ऐसा लगता है कि वह खुद इस मुद्दे पर अपना नैतिक आधार खो सकते हैं. इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह चर्चा जोरों पर है कि उनका बेटा निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में एंट्री लेने वाले है.

हाल की घटनाओं से बढ़ी nishant kumar को लेकर अटकलें

जनवरी 2025 में पहली बार एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत के साथ सार्वजनिक रूप से नजर आए. इस कार्यक्रम में पहली बार निशांत ने खुलकर राजनीति पर अपनी बात रखी और आगामी चुनावों में जनता दल (यूनाइटेड) के लिए समर्थन मांगा. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के विकास और प्रगति के लिए नीतीश कुमार का नेतृत्व जारी है. इसके बाद निशांत सीधे तौर पर राजनीतिक मंचों पर नहीं दिखे लेकिन उनके बयान बाजी करते रहे और पिता के लिए समर्थन मांगते दिखे. फिर होली के मौके पर भी निशांत सक्रिय दिखे और जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ घुलते-मिलते नजर आए. यह उनकी राजनीति में दिलचस्पी और भागीदारी को लेकर एक और महत्वपूर्ण संकेत था.

होली पर पटना स्थित जनता दल (यूनाइटेड) के दफ्तर के बाहर एक बड़ा होर्डिंग देखा गया, जिसमें निशांत कुमार को उनके पिता नीतीश कुमार के साथ दिखाया गया. इस पोस्टर पर लिखा था, “बिहार की मांग, सुन लिए निशांत, बहुत-बहुत धन्यवाद!” यह संदेश साफ इशारा करता है कि जेडीयू के अंदर ही एक धड़ा चाहता है कि निशांत राजनीति में आएं,ताकि पार्टी को मजबूती मिले और विपक्ष द्वारा नीतीश कुमार की सेहत को लेकर किए जा रहे हमलों का प्रभाव कम हो.

मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं

हालांकि, अब तक निशांत (nishant kumar) या जेडीयू की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. लेकिन जब निशांत से उनकी राजनीतिक पारी की संभावना पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि जनता ही तय करेगी कि आगे क्या होगा. उन्हें देखना चाहिए कि कौन सक्षम है. उनका यह बयान न केवल राजनीतिक रूप से सही था, बल्कि इतना खुला भी था कि इससे उनके राजनीति में आने की चर्चा जारी रह सके. नीतीश कुमार के वर्तमान सहयोगी बीजेपी, जो वंशवाद की राजनीति के खिलाफ रही है, इस मुद्दे पर सावधानी बरत रही है. बिहार के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी ने कहा कि उनकी पार्टी जेडीयू द्वारा लिए गए फैसले का समर्थन करेगी. जेडीयू के अन्य सहयोगियों ने भी निशांत का स्वागत किया, बशर्ते वे राजनीति में आने का फैसला लें.

राजद नेता तेजस्वी यादव, जो खुद नीतीश और बीजेपी के वंशवाद विरोधी हमलों का शिकार होते रहे हैं, ने इस पर दिलचस्प प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “वे हमारे भाई हैं. मैं चाहता हूं कि वे जल्द राजनीति में आएं, नहीं तो बीजेपी जेडीयू को खत्म कर देगी. अगर वे राजनीति में आते हैं, तो जेडीयू के बचने की संभावना होगी. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वे पार्टी के लिए कितना काम करते हैं.”

बिहार की नई राजनीति: दूसरी पीढ़ी के नेताओं का दौर?

ऐसे में अगर निशांत कुमार राजनीति में आते हैं, तो बिहार में दूसरी पीढ़ी के नेताओं की एक नई तिकड़ी बन जाएगी, जिसमें पहले से ही तेजस्वी यादव और चिराग पासवान सक्रिय हैं. ये तीनों नेता अपने-अपने पिता के राजनीतिक नक्शे पर चलेंगे, जिससे बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है.

जेडीयू के लिए क्यों जरूरी हो सकते हैं nishant kumar ?

जेडीयू पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति में प्रभावशाली रही है, लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में अपने सबसे बड़े संकट से गुजरी. उस चुनाव में जेडीयू को सिर्फ 45 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी को 74 सीटें हासिल हुईं. हालांकि, बीजेपी ने अपनी पूर्व-निर्धारित शर्तों के अनुसार नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाए रखा. उसके बाद नीतीश कुमार ने पाला भी बदला लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश एक बार फिर भाजपा के साथ हो गए. 2024 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने 14 सीटें जीतीं . इससे नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक ताकत फिर से साबित की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को मजबूत समर्थन दिया.

नीतीश कुमार के नेतृत्व पर निर्भर है जदयू

लेकिन अब विधानसभा चुनावों से पहले, जेडीयू की राजनीतिक स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है. अगर निशांत राजनीति में आते हैं, तो वे पार्टी के भीतर संगठनात्मक कामों में नीतीश की मदद कर सकते हैं. इससे नीतीश को राज्य की राजनीति पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा और वे जेडीयू की पुरानी प्रतिष्ठा को बहाल करने की कोशिश कर सकते हैं. पिछले 20 वर्षों से जेडीयू पूरी तरह से नीतीश कुमार के नेतृत्व पर निर्भर रही है. अब तक, उन्होंने अपने परिवार को राजनीति से दूर रखा था, लेकिन पार्टी की गिरती राजनीतिक स्थिति और उनकी बढ़ती उम्र को देखते हुए, अब उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं. हालांकि, नीतीश ने अभी तक इस विषय पर खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी के मंत्रियों और नेताओं को इस मुद्दे को उठाने से भी नहीं रोका है. इससे साफ संकेत मिलता है कि बिहार के मुख्यमंत्री इस पर प्रतिक्रिया जानने के लिए ‘ट्रायल बैलून’ छोड़ रहे हैं.

अब देखना यह होगा कि क्या 2025 के चुनाव में बिहार की राजनीति में एक नए ‘बेटे’ (nishant kumar)का उदय होता है या नहीं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *