PNB scam : जनवरी 2018 भारतीय बैंकिंग इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है, जब पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में एक विशाल घोटाला सामने आया. यह घोटाला शुरू में 280 करोड़ रुपये का बताया गया था, लेकिन जांच के बाद यह राशि बढ़कर 13,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. मुख्य आरोपी हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी थे, जिन्होंने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से इस घोटाले को अंजाम दिया.
पंजाब नेशनल बैंक से 13,500 करोड़ रुपये का घोटाला
नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने 2008 से 2018 तक पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस शाखा में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LOU) और फॉरेन लेटर ऑफ क्रेडिट (FLC) के माध्यम से अवैध लेनदेन किए. इन दस्तावेजों के जरिए वे बिना उचित सिक्योरिटी के विदेशी बैंकों से फंड्स प्राप्त करते थे, जिन पर न तो ब्याज चुकाया जाता था और न ही बैंक रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज किया जाता था. ऐसा पिछले 10 सालों से हो रहा था.
PNB scam : कैसे होती थी हेराफेरी
जब नीरव मोदी ने देखा कि उसकी तरकीब काम कर रही है तो इसके बाद उसने कई देशों में सेल कंपनियां बनाई और फिर उन कंपनियों के जरिए खराब क्वालिटी के हीरे की वैल्यू बढ़ाकर करोड़ों रुपये PNB बैंक से विदेश ले जाने लगा. दरअसल होता क्या है कि अगर किसी बिजनेसमैन को किसी दूसरे देश के एक्सपोर्ट से बड़े अमाउंट का सामान मंगाना है लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं है तो वह बैंक से मदद मांगता हैं. लेकिन विदेशी बैंक किसी दूसरे देश के नागरिक को ऐसे लोन अप्रूव नहीं करता है. इस के लिए इस कंडीशन में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LOU) नाम का एक पेपर बिजनेसमैन को अपने देश के किसी भी बैंक से ट्रांसफर करवाना होता है, जिसके बाद विदेशी बैंक उस एक्सपोर्टर को बिजनेसमैन के नाम पर पैसा दे देती है. LoU जारी होने के बाद उस बैंक की जिम्मेदारी होती है कि वह विदेशी बैंक को पैसा दे. एलओयू बनाने के बदले बैंक बिजनेसमैन से उतने अमाउंट का सिक्योरिटी पेपर जैसी चीजें गिरवी पर रखता है. बस यहीं पर मेहुल चोकसी और नीरव मोदी खेल करते हैं.
PNB scam : कैसे हुआ मामले का खुलासा
16 जनवरी 2018 को जब नीरव मोदी की कंपनियों के अधिकारियों ने बिना किसी जमानत के क्रेडिट के लिए बैंक से संपर्क किया, तो बैंक अधिकारियों को इस घोटाले के बारे में पता चला. बैंक ने पाया कि पूर्व में इस तरह की अवैध सुविधाओं की अनुमति देने वाले अधिकारी अब रिटायर हो चुके थे, जिससे जांच की प्रक्रिया और जटिल हो गई. इस घोटाले के कारण पंजाब नेशनल बैंक को वित्त वर्ष 2018-19 में 10,026.41 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. बैंक की वित्तीय स्थिति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा, लेकिन सरकारी सहायता से बैंक को स्थिर किया गया.
चोकसी के खिलाफ तीन चार्जशीट दाखिल
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो चोकसी 2018 से एंटीगुआ में रह रहा है. 2019 में ED ने चोकसी के खिलाफ तीन चार्जशीट दाखिल कर बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया था कि चोकसी भगोड़ा और फरार है. 2018 में पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद चोकसी भारत छोड़कर फरार हो गया था. चोकसी का भतीजा नीरव मोदी भी इस घोटाले में आरोपी है और लंदन में प्रत्यर्पण कार्यवाही का सामना कर रहा है. चोकसी की मई 2021 में एंटिगुआ से लापता होने की खबरें भी सामने आई थीं, लेकिन बाद में उसके डोमिनिका में होने की खबर आई थी. सीबीआई ने इंटरपोल से मेहुल चोकसी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की अपील की थी. इसके बाद 2018 में इंटरपोल ने चोकसी के खिलाफ रेड नोटिस जारी किया था. रेड नोटिस हटाने के लिए चोकसी की ओर से इंटरपोल में याचिका दायर हुई थी. इसमें उसने दावा किया था कि 2021 में भारतीय जांच एजेंसियों उसका अपहरण कर लिया था और डोमिनिका ले गए थे. इसी वजह से इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड नोटिस को हटाने का फैसला लिया है. ईडी ने 2018 में चोकसी की 1,217 करोड़ रुपये की 41 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था. कुर्क की गई संपत्तियों में मुंबई के एक पॉश इलाके में उसके दो फ्लैट, कोलकाता में एक मॉल, मुंबई-गोवा हाईवे पर 27 एकड़ जमीन, तमिलनाडु में 101 एकड़ जमीन, नासिक, नागपुर, आंध्र प्रदेश में जमीनें, ऑलबाग में दो बंगले और सूरत में कार्यालय शामिल हैं.
अब इस मामले में भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया है. 12 अप्रैल को ही उसे बेल्जियम के अस्पताल से गिरफ्तार कर लिया गया है. अब उसे भारत लाने की कोशिश की जाएगी. भारतीय जांच एजेंसियों ED और CBI ने प्रर्त्यापण की कोशिश शुरू कर दी है. जल्द ही वह भारत आ सकता है.