NDA का विभीषण लगाएगा विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की नैया पार… सीटों के बंटवारे को लेकर अंदरूनी खींचतान 

Bihar Assembly Elections 2025 : विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से बिहार की सियासत एक बार फिर करवट ले सकती है. एक ओर जहां 2025 के विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई है वहीं राज्य में विपक्षी दलों की बढ़ रही एकजुटता के कारण, महागठबंधन (Mahagathbandhan) की तस्वीर पहले से कहीं अधिक रंग-बिरंगी नजर आ रही है.

वीआईपी और रालोजपा दोनों महागठबंधन में होगें शामिल

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में राजद के नेतृत्व में बने विपक्षी गठबंधन में टोटल पांच पार्टियां थी ,राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, और वामपंथी खेमे के तीन दल: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले). लेकिन इस बार चुनावी समर में महागठबंधन का दायरा और भी बड़ा देखने को मिल सकता है.

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो  2025 के चुनाव में महागठबंधन में दो नए दलों के जुड़ने की संभावना जताई जा रही है. जिसमें मुकेश सहनी की पार्टी  विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) भी इस बार महागठबंधन का हिस्सा हो सकती है. जिनकी भूमिका भले ही छोटा दिख रहा हो, मगर निर्णायक वोट बैंक के चलते यह काफी अहम मानी जा रही है. वीआईपी ने तो 2024 के लोकसभा चुनाव में ही गठबंधन के साथ कदमताल कर यह संकेत दे दिया था कि वह आगे भी इसी खेमे में रहना चाहती है. उस चुनाव में राजद ने अपने कोटे से तीन सीटें वीआईपी को देकर न सिर्फ अपने गठबंधन धर्म का निर्वाह किया, बल्कि यह भी जताया कि वह छोटे दलों को प्रतिनिधित्व देने के लिए तैयार है.

Mahagathbandhan में सीटों के बंटवारे को लेकर अंदरूनी खींचतान

लेकिन सवाल उठता है कि अगर वीआईपी और रालोजपा दोनों महागठबंधन में शामिल हो जाते हैं, तो सीटों के बंटवारे में किसे क्या मिलेगा? क्योंकि बिहार की राजनीति में ज्यादा सीटें न सिर्फ सम्मान का सवाल होती हैं, बल्कि संसाधनों और प्रचार में भी उसका असर पड़ता है. जाहिर है, इन नए सहयोगियों के लिए जगह बनाने के लिए किसी न किसी मौजूदा दल को अपने हिस्से की सीटें छोड़नी होंगी. खासकर कांग्रेस और वामदलों की ओर से इस मुद्दे पर असहमति की जता सकती हैं, क्योंकि 2020 में भी सीटों के बंटवारे को लेकर अंदरूनी खींचतान देखी गई थी. इस बार दलों की संख्या बढ़ने से यह समन्वय और भी जटिल हो सकता है.

Mahagathbandhan के नए समीकरण में राजद की क्या होगी भूमिका

वीआईपी और रालोजपा दोनों ही दल क्षेत्रीय स्तर पर अपनी पकड़ रखते हैं. वीआईपी को निषाद समुदाय के वोटों पर प्रभाव माना जाता है, जबकि रालोजपा की पकड़ पश्चिमी बिहार के कुछ जिलों में मजबूत बताई जाती है. ऐसे में महागठबंधन इन्हें साथ लाकर अपने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश करेगा. हालांकि बतौर मुख्य दल इस नए समीकरण में राजद सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा. लेकिन राजद के लिए गठबंधन में सभी दलों को साथ लेकर चलना और सीट बंटवारे में तालमेल बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होगा. लेकिन अगर यह गठबंधन एकजुट रहता है और अपने आंतरिक मतभेदों को नियंत्रित कर पाता है, तो यह भाजपा और एनडीए के खिलाफ एक बड़ी ताकत बन सकता है.

चुनाव से पहले समीकरणों में बड़ा बदलाव

बिहार की राजनीति में गठबंधन की राजनीति कोई नई बात नहीं है, लेकिन हर चुनाव से पहले इसके समीकरणों में बड़ा बदलाव देखा जाता है. 2025 के चुनाव में महागठबंधन का यह विस्तार जहां एक ओर इसकी ताकत बन सकता है, वहीं सीटों का समायोजन एक परीक्षा भी साबित हो सकता है. आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बढ़ता हुआ गठबंधन अपनी एकजुटता बनाए रख पाता है, या फिर बढ़ती भीड़ के चलते आपसी मतभेद इसकी राह में रोड़े अटकाते हैं.

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