अवमानना की कार्रवाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवादित बयान का मामला, क्या निशिकांत दुबे पर होगा एक्शन?

Nishikant Dubey on Supreme Court : भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सुप्रीम कोर्ट और देश के मुख्य न्यायाधीश पर दिए गए विवादास्पद बयान ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है. झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट को देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए जिम्मेदार ठहराया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है और इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है.

Nishikant Dubey  का सुप्रीम कोर्ट  पर बड़ा आरोप

एक मीडिया इंटरव्यू में बोलते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है. सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमा से बाहर जा रहा है. अगर हर बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना है, तो संसद और विधानसभा का कोई मतलब नहीं है, इसे बंद कर देना चाहिए. इतना ही नहीं, उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश पर भी निशाना साधते हुए कहा, कि इस देश में जितने गृह युद्ध हो रहे हैं, उसके ज़िम्मेदार केवल चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया संजीव खन्ना साहब हैं. उत्तर प्रदेश से बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने भी दुबे की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से विधायिका और न्यायपालिका के अधिकार तय किए गए हैं. भारत के संविधान के अनुसार, कोई भी लोकसभा और राज्यसभा को निर्देशित नहीं कर सकता और राष्ट्रपति सर्वोच्च हैं.

हलांकि बयानों के बाद पैदा हुए विवाद को देखते हुए बीजेपी ने तुरंत डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की. पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर अपने एक पोस्ट में कहा कि इन बयानों से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है. नड्डा ने कहा कि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे(Nishikant Dubey) और दिनेश शर्मा का न्यायपालिका एवं देश के चीफ़ जस्टिस पर दिया गया बयान उनका व्यक्तिगत विचार है. पार्टी न तो इन बयानों से इत्तेफाक रखती है और न ही समर्थन करती है. बीजेपी इन बयानों को सिरे से खारिज करती है. उन्होंने आगे लिखा कि बीजेपी हमेशा न्यायपालिका का सम्मान करती रही है और सुप्रीम कोर्ट समेत देश की सभी अदालतों को लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा मानती है. मैंने इन दोनों नेताओं और अन्य सभी को ऐसे बयान न देने की हिदायत दी है.

विपक्ष की सख्त प्रतिक्रिया

वहीं निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा के इस वयान पर विपक्ष ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी सुप्रीम कोर्ट को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के कुछ फैसलों को असंवैधानिक ठहरा रही है इसलिए संवैधानिक पदाधिकारी, मंत्री और सांसद जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट को निशाना बना रहे हैं. तो यूथ कांग्रेस अध्यक्ष वरुण चौधरी ने भी एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि सत्ता के नशे में चूर बीजेपी सांसद का यह बयान न केवल शर्मनाक है बल्कि लोकतंत्र पर सीधा हमला है. कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी दुबे का वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि सत्ता का नशा सिर चढ़ कर बोल रहा है.एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी हैदराबाद में एक रैली के दौरान बीजेपी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी अदालत को धमकी दे रही है. यह धार्मिक युद्ध की धमकी है और संविधान को लेकर फ्रॉड किया जा रहा है. आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने दुबे की टिप्पणी को घटिया करार देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक अवमानना याचिका दाखिल

वहीं इस मामले में अब पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक अवमानना याचिका दाखिल की है.अमिताभ ठाकुर ने कहा कि निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) की टिप्पणियां स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश की आपराधिक अवमानना के अंतर्गत आती हैं. मैंने अदालत से निवेदन किया है कि उन्हें सजा दी जाए. उधर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और ऑल इंडिया बार एसोसिएशन (AIBA) के पूर्व चेयरमैन डॉ. आदीश सी. अग्रवाल ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे पार्टी के नेताओं को न्यायपालिका के खिलाफ बयानबाजी से रोकें.

सुप्रीम कोर्ट जैसे संवैधानिक संस्थान पर सीधे हमले और मुख्य न्यायाधीश पर गंभीर आरोपों ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है. हालांकि बीजेपी ने अपने सांसदों के बयानों से दूरी बना ली है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह सब एक सुनियोजित रणनीति के तहत हो रहा है. अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या यह मामला किसी कानूनी कार्रवाई तक पहुंचता है.

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