Bangladesh interim government : बांग्लादेश एक बार फिर से गहरे राजनीतिक संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है। अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने राजनीतिक दलों के बीच चुनावी सुधारों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में इस्तीफे की धमकी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें अपेक्षित राजनीतिक समर्थन नहीं मिला, तो वे अपनी जिम्मेदारी निभाना संभव नहीं समझेंगे। यूनुस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक असमानता, और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। उनके इस संकेत ने एक बार फिर बांग्लादेश की सत्ता में शेख हसीना की वापसी की संभावनाओं को हवा दे दी है।
Bangladesh interim government : कैसे शुरू हुआ मौजूदा संकट?
अगस्त 2024 में छात्र आंदोलनों के बाद शेख हसीना की 15 वर्षों से चली आ रही सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रणाली के खिलाफ छात्रों ने पहले शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किया, जो बाद में हिंसक टकराव में बदल गया। छात्र आंदोलनों की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार रहीं:
- 1 जुलाई: छात्रों ने देशभर में सड़क और रेलवे मार्गों को अवरुद्ध कर आंदोलन की शुरुआत की।
- 16 जुलाई: विभिन्न झड़पों में कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई।
- 18 जुलाई: सरकारी टीवी स्टेशन और अन्य प्रमुख इमारतों में आगजनी की घटनाएं हुईं।
- 21 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कोटा प्रणाली को अवैध करार दिया।
- 5 अगस्त: प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री आवास पर हमला किया, जिसके बाद शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी।
इन घटनाओं के बाद, सेना ने हस्तक्षेप कर अंतरिम सरकार का गठन किया और देश के जाने-माने अर्थशास्त्री प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार (प्रधानमंत्री के समकक्ष पद) के रूप में नियुक्त किया गया।
यूनुस की अंतरिम सरकार पर भी संकट के बादल
लगभग एक साल बाद, यूनुस की सरकार (Bangladesh interim government) भी राजनीतिक दबाव, विरोध और विश्वास के संकट से घिरी हुई है। नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के प्रमुख नाहिद इस्लाम ने कहा, “सर यूनुस साफ तौर पर तनाव और निराशा में दिखे। उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक समर्थन नहीं मिला तो वे यह ज़िम्मेदारी नहीं उठा पाएंगे। इस्लाम ने यह भी कहा कि “लोगों ने सिर्फ सरकार बदलने के लिए आंदोलन नहीं किया था, बल्कि वे व्यवस्था में बदलाव चाहते थे। यदि चुनाव पुराने ढर्रे पर हुए, तो यह जनता के साथ धोखा होगा।”
Bangladesh में अब तक क्यों नहीं हो पाया चुनाव ?
हालांकि यूनुस ने अंतरिम सरकार के गठन के बाद कई चुनावी और प्रशासनिक सुधारों की बात कही थी, लेकिन विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक सहमति का अभाव उनके प्रयासों में सबसे बड़ी बाधा बना रहा है। अब तक कोई स्पष्ट चुनाव तिथि भी घोषित नहीं की गई है। हाल ही में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ढाका में चुनाव तिथि घोषित करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद से राजनीतिक तापमान फिर से बढ़ गया है।
अब यह देखना अहम होगा कि प्रोफेसर यूनुस अपने इस्तीफे की धमकी पर अटल रहते हैं या पीछे हटते हैं। वहीं, यह भी चर्चा का विषय बन गया है कि यदि यूनुस पद छोड़ते हैं, तो क्या सेना दोबारा हस्तक्षेप करेगी, या फिर देश में लोकतंत्र बहाली की प्रक्रिया और भी उलझ जाएगी। बांग्लादेश की जनता, जिसने पिछले साल बदलाव की उम्मीद में सड़कों पर उतर कर इतिहास रचा था, अब फिर से अनिश्चितता के भंवर में फंसी नजर आ रही है।