पार्टी और परिवार से बेदखल….अब क्या करेंगे तेज प्रताप यादव ? बनाएंगे अपनी पार्टी या थामेंगे दूसरी पार्टी का दामन…!

Tej Pratap Yadav political future : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने रविवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया. इसके साथ ही लालू यादव ने पारिवारिक स्तर पर भी तेज प्रताप से नाता तोड़ने का एलान कर दिया है. RJD प्रमुख ने तेज प्रताप यादव के ‘गैर-जिम्मेदाराना आचरण’ और ‘पारिवारिक मूल्यों तथा सार्वजनिक शिष्टाचार से हटने’ का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया…लेकिन तेज प्रताप यादव का यह निजी विवाद अब पूरी तरह से राजनीतिक शक्ल ले चुका है. बिहार की राजनीति में इसे लेकर जबरदस्त हलचल है, खासकर तब, जब राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं. सवाल यह है कि तेज प्रताप अब क्या कदम उठाएंगे?

Tej Pratap Yadav के पास क्या हैं विकल्प ?

राजनीति के जानकारों का कहना है कि पार्टी और परिवार से निकाले जाने के वावजूद तेज प्रताप यादव कई विकल्प हैं जिससे वो राजनीति में प्रासांगिक बने रह सकते हैं.

नई पार्टी का गठन

तेज प्रताप पहले भी कई बार आरजेडी से असंतोष जताकर समानांतर संगठन बना चुके हैं. इस बार जब आरजेडी के दरवाजे पूरी तरह बंद हो चुके हैं और पारिवारिक रिश्ता भी टूट चुका है, तो यह प्रबल संभावना बनती है कि वे अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बना सकते हैं. पार्टी में रहते हुए तेज प्रताप पहले भी ऐसे प्रयोग कर चुके हैं. तेज प्रताप के पहले के संगठन:

  • धर्म समर्थक सेवक संघ (DSS) – 2017 में RSS के समानांतर धर्मनिरपेक्ष संगठन के रूप में शुरुआत।
  • यदुवंशी सेना – यादव समुदाय को केंद्र में रखकर संगठन।
  • तेज सेना – युवाओं को जोड़ने का प्रयास, जून 2019 में गठन।
  • लालू-राबड़ी मोर्चा – पार्टी के कामकाज से असंतोष के बाद 2019 में बना संगठन।
  • छात्र जनशक्ति परिषद (CJP) – 2021 में छात्र राजनीति के जरिए नया प्रयोग।

इन संगठनों का प्रयोग उन्हें नई राजनीतिक पार्टी की जमीन तैयार करने में मदद कर सकता है।

किसी अन्य पार्टी में शामिल होना

तेज प्रताप पहले नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके हैं. चाचा नीतीश से उनके संबंध मधुर रहे हैं. ऐसे में यदि ऑफर मिलता है, तो वे जेडीयू में जा सकते हैं. लेकिन यह तभी मुमकिन है, जब तेज प्रताप अपने सार्वजनिक बयानों और निजी विवादों को लेकर संयम दिखाएं. दूसरा ऑप्सन है भाजपा, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि तेज प्रताप का बीजेपी में जाना मुश्किल है. वे हमेशा से खुद को धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं. निजी विवादों, तलाक प्रकरण और अनियंत्रित बयानों के कारण बीजेपी जैसी पार्टी उन्हें जगह देने में संकोच कर सकती है.

यदि तेज प्रताप किसी पार्टी में नहीं जाते और नई पार्टी भी नहीं बनाते, तो उनके पास विकल्प बचता है निर्दलीय चुनाव लड़ने का. वे दो बार विधायक रह चुके हैं और सरकार में मंत्री भी. यदि वे मुस्लिम-यादव बहुल सीट से चुनाव लड़ते हैं, तो जीत की संभावना बन सकती है. और राजनीतिक समीकरण के अनुसार, अगर आरजेडी उस सीट से अपना उम्मीदवार नहीं उतारती, तो तेज प्रताप को अप्रत्यक्ष समर्थन मिल सकता है.

आरजेडी में वापसी की कोशिश

हालांकि अभी उनके निष्कासन की मियाद छह साल की है, लेकिन अगर तेज प्रताप संयम रखें और चुनावी समीकरण में खुद को प्रासंगिक बनाए रखें, तो पार्टी में वापसी के लिए दबाव बन सकता है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लालू यादव के बिना तेज प्रताप की राजनीति अधूरी है. तेजस्वी यादव से मतभेद के बावजूद, परिवार में तेज प्रताप को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. समय के साथ समीकरण बदल सकते हैं.

Tej Pratap Yadav की राह मुश्किल, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं

तेजस्वी यादव की तुलना में तेज प्रताप की राजनीतिक गंभीरता अक्सर सवालों के घेरे में रही है. लेकिन यह भी सच है कि तेज प्रताप जनता से जुड़ाव रखने वाले नेता हैं, खासकर युवा यादव वर्ग में उनकी एक फॉलोइंग है. उनके बयानों की वजह से वे अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन यदि वे अपनी राजनीतिक दिशा को स्पष्ट और ठोस बना लें, तो उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल होगा. लालू यादव और आरजेडी से नाता टूटना तेज प्रताप यादव के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका है. लेकिन राजनीति में संभावना का द्वार कभी पूरी तरह बंद नहीं होता. अब यह तेज प्रताप पर निर्भर करता है कि वे अपने अगले कदम को कितनी समझदारी और रणनीति के साथ उठाते हैं, क्या वे नई पार्टी बनाएंगे, गठबंधन करेंगे या आरजेडी में वापसी की जमीन तैयार करेंगे?

क्या है Tej Pratap Yadav  विवाद ?

तेज प्रताप यादव ने हाल ही में अपने प्रेम संबंध को लेकर फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक फोटो पोस्ट किए, जिन्हें कुछ ही समय बाद डिलीट कर दिया. उन्होंने इन पोस्ट को अकाउंट हैक होने का नतीजा बताया, लेकिन लगातार डिलीट और रीपोस्ट किए जाने से मामला गर्मा गया. शनिवार की शाम से शुरू हुए सोशल मीडिया पोस्ट के इस सिलसिले ने रविवार को उस वक्त नाटकीय मोड़ ले लिया, जब लालू यादव ने तेज प्रताप को पहले पार्टी और फिर परिवार से बाहर कर दिया.

 

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