Rjd State President in bihar : बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले RJD ने बड़ा फैसला किया है. पार्टी ने अपने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की जगह मंगनी लाल मंडल को यह जिम्मेदारी सौंपीं है. लालू और नीतिश कुमार के पुराने सहयोगी रहे मंगनी लाल मंडल को लेकर RJD का यह दांव चुनावी साल में कितना सटीक बैठेगा,यह तो वक्त बताएगा लेकिन जो मौजूदा समीकरण है उसके हिसाब से राजद का चुनावी साल में यह दांव आत्मघाती फैसला लगता है. हालांकि राजनीति में कुछ भी पहले आंक लेना पूरी तरह से ठीक भी नहीं होता लेकिन बात तो की जा सकती है.
RJD द्वारा मौजूदा बिहार प्रदेश अध्यक्ष से तीन साल छोटे व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का फैसला यूँ ही तो नहीं लिया गया होगा. अभी तक 79 साल के जगदानंद सिंह बिहार के प्रदेश अध्यक्ष है…लेकिन अब उनकी जगह 76 साल के मंगनी लाल मंडल नए बिहार प्रदेश अध्यक्ष होंगे. ऐसे में राजनीति के लिहाज से यह सवाल लाजिम है कि एक तरफ तेजस्वी युवा की बात करते है तो दूसरी तरफ लालू यादव 76 साल के मंगनी लाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाते हैं…हालांकि राजनीति के जानकार इस फैसले को अनुभव और सामाजिक आधार से जोड़ने के साथ-साथ लालू और तेजस्वी की नई रणनीति की ओर संकेत करार देते हैं..
लेकिन जब अनुभव की बात है तो फिर जगदानंद सिंह ना सिर्फ उनसे तीन साल बड़े है राजद के विश्वासी भी है…क्योंकि मंगनी लाल एक बार पार्टी बदल कर नीतीश के साथ हो चले थे…तो सवाल उठता है कि पार्टी ने मंगनी लाल मंडल को ही प्रदेश अध्यक्ष के लिए क्यों चुना ? लालू यादव और तेजस्वी यादव बिहार में कैसी सियासत करना चाहते हैं? खैर….
गौरतलब है कि मंगनी लाल मंडल ने 17 जनवरी 2025 को JDU छोड़ वापस से RJD में शामिल हुए थे…मंगनी लाल अतिपिछड़ा वर्ग यानी की EBC से आते हैं…बिहार में EBC वोटरों की संख्या करीब 30-35% है और बीते कई विधानसभा और लेकसभा चुनाव में यह समुदाय सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका में रहा है…लालू यादव के राजनीति की पुरानी रणनीति भी इस समुदाय के सामाजिक समीकरणों को साधकर वोट बैंक को मजबूत करना रहा है…और मंगनी लाल मंडल मिथिलांचल के उस हिस्से से आते हैं जिसकी पहचान अपने इलाके में एक जनाधार वाले नेता के तौर पर हैं…और मिथिलांचल का यह हिस्सा आरजेडी के लिए कमजोर प्रदर्शन वाला भी रहा है..तो मंगनी लाल मंडल का अनुभव और उत्तर बिहार में उनकी मजबूत पकड़ आरजेडी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है…और खास कर तब जब JDU और BJP EBC वोटरों को रिझाने में जुटी है. ऐसे में लालू का यह फैसला… मंडल के जरिए EBC को RJD के पक्ष में लामबंद कर सकती है…
लेकिन इसके साथ साथ जानकारों का मानना है कि मंगनी लाल मंडल को राजद का प्रदेश अध्यक्ष बनाना राजद के लिए चुनावी साल में आत्मघाती फैसला हो सकता है. क्योंकि मंगनी लाल मंडल एक तो पार्टी के प्रति वफादार नहीं रहे हैं…इससे पहले वो राजद छोड़ कर जा चुके थे. इसके अलावा युवा नेतृत्व का तेजस्वी का नारा भी पिट सकता है और जिस जाति को तोड़ने की रणनीति तेजस्वी बनाना चाहते हैं उसमें मंगनी लाल मंडल की स्वीकार्यता होगी इसको पक्के तौर पर कहा नहीं जा सकता.
इसके साथ साथ राजद की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में मंगनी लाल मंडल रबर स्टाम्प अध्यक्ष माने जाएंगे…और पार्टी की परिवारवाद वाली राजनीतिक छवि पहले से है… अध्यक्ष बनाए जाने के कारण पार्टी के स्थापित पुराने नेता उनसे नाखुश होंगे और नए नेताओं के साथ सामंजस्य बैठा पाना भी उनके लिए आसान नहीं रहेगा….कुल मिलाकर देखें तो बिहार की राजनीति में लालू का यह नया दांव कितना कारगर होगा इसका फैसला तो जनता करेगी….