सीटों पर मंथन, गठबंधनों में खींचतान
महागठबंधन में राजद की अगुवाई में बैठकों का दौर जारी है। सीट शेयरिंग (assembly elections ) को लेकर तेजस्वी यादव और कांग्रेस के साथ छोटे दलों में राय-मशविरा चल रहा है। दूसरी ओर एनडीए में औपचारिक बातचीत तो अभी नहीं हुई है, लेकिन लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान 70 सीटों की दावेदारी ठोक चुके हैं। वहीं जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) 15–20 सीटों की चाह रखती है। जेडीयू और बीजेपी की आपसी खींचतान भी जगजाहिर है। लेकिन इन सबके बीच कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जो खुद को इस पारंपरिक खेमे की राजनीति से अलग दिखाने की कोशिश में हैं।
- चिराग पासवान – गठबंधन में रहकर स्वतंत्र चाल?
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। उन्होंने आरा में आयोजित नव संकल्प सभा में इसे “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” अभियान का हिस्सा बताया। हालांकि चिराग एनडीए के घटक दल हैं, लेकिन उनका यह रुख गठबंधन के भीतर असहजता जरूर बढ़ा रहा है। बीजेपी जहां इसे ‘गठबंधन के तहत’ लड़ने की बात कहती है, वहीं जेडीयू ऐसे दावों से किनारा कर रही है। चिराग के इस अंदाज से अंदेशा है कि जरूरत पड़ी तो वे अलग राह भी अपना सकते हैं, जैसा वे 2020 में कर चुके हैं।
- पुष्पम प्रिया चौधरी – फिर एक बार ‘प्लूरल्स’ पर दांव
प्लूरल्स पार्टी की प्रमुख पुष्पम प्रिया चौधरी ने 2020 में अखबारों में विज्ञापन देकर खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था। तब उन्होंने दो सीटों से चुनाव लड़ा और उनकी पार्टी ने सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन नतीजा शून्य रहा। अब एक बार फिर पुष्पम ने 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि प्लूरल्स किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी, न पहले और न आगे। वे इसे एक वैकल्पिक विचारधारा और नयी राजनीति की शुरुआत के तौर पर पेश कर रही हैं।
- प्रशांत किशोर – जन सुराज की ‘243 सीटों की रणनीति’
चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने ‘जन सुराज’ अभियान के तहत बिहार में खुद की पार्टी का गठन कर लिया है। एक साल से ज़्यादा समय से वे राज्य भर में पदयात्रा कर रहे हैं। अब पीके की पार्टी भी सभी 243 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं होंगे, चाहे चुनाव के पहले हो या बाद में। पीके का दावा है कि वे सिर्फ चुनाव नहीं लड़ रहे, बल्कि ‘व्यवस्था में बदलाव’ की लड़ाई लड़ रहे हैं।
- शिवदीप लांडे – पूर्व आईपीएस की ‘हिंद सेना’ का इरादा
पूर्व आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे ने हाल ही में ‘हिंद सेना’ नामक पार्टी की घोषणा की है और वह भी सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की बात कह चुके हैं। लांडे बिहार में अपनी लोकप्रियता और युवाओं के बीच प्रभाव का लाभ उठाकर राजनीति में उतर रहे हैं। वे विभिन्न जिलों का दौरा कर संगठन विस्तार में जुटे हैं और युवाओं को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
assembly elections : तीसरे मोर्चा वोट काटेंगे या समीकरण बनाएंगे?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह तीसरा खेमा आने वाले चुनावों में निर्णायक भूमिका तो नहीं निभा सकता, लेकिन गठबंधनों के लिए ‘स्पॉइलर’ की भूमिका ज़रूर अदा कर सकता है। खासकर त्रिकोणीय मुकाबले वाली सीटों पर उनकी मौजूदगी किसी भी गठबंधन के समीकरण को बिगाड़ सकती है।
चिराग पासवान के लिए चुनौती यह होगी कि वे एनडीए में रहते हुए कितनी स्वतंत्रता से सीटों पर दावा कर सकते हैं। पुष्पम प्रिया और पीके के लिए यह परीक्षा होगी कि क्या वे शहरी युवाओं से बाहर भी अपनी पकड़ बना पाते हैं या नहीं। शिवदीप लांडे के लिए संगठनात्मक ढांचे और राजनीतिक अनुभव की कमी एक बाधा बन सकती है। देखा जाए तो बिहार की राजनीति हमेशा जातीय समीकरणों, गठबंधनों और नेताओं के व्यक्तिगत करिश्मे के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में 243 सीटों पर अलग-अलग छोटे दलों का उतरना न सिर्फ मतों के बंटवारे का कारण बन सकता है, बल्कि यह भी तय करेगा कि किस गठबंधन का पलड़ा भारी रहेगा। तो क्या तीसरा खेमा सिर्फ बायनामी ताकत बनकर रह जाएगा या वाकई कोई नया समीकरण गढ़ेगा? इसका जवाब अक्टूबर-नवंबर के चुनावी (assembly elections) नतीजों में मिलेगा।