Iran Israel Ceasefire: आपने वो कहावत तो सुनी होगी…अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना…ऐसा ही हाल आज कल कुछ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का है…जो कभी नोबेल शांति पुरस्कार की मांग करते हैं तो कभी ईरान पर अपनी महत्वाकांक्षा के लिए बमबारी करवाते हैं…और फिर क्रेडिट के लिए सोशल मीडिया पर भटकते हैं…खैर मुद्दे पर लौटते हैं…पश्चिम एशिया में फैलते ईरान-इजरायल संघर्ष पर आखिरकार ब्रेक लग गया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर यानी की युद्धविराम को लेकर सहमति बन गई है. लेकिन कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए यह खबर सामने आई की अमेरिका ने नहीं बल्कि एक खाड़ी देश ने ईरान-इजरायल के बीच जारी संघर्ष को रोकने में महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभाई.
इस पूरे मामले को समझने के लिए पीछे चलते हैं….13 जून 2025 को इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर एकतरफा हवाई हमले किए थे. इस हमले में इजरायल ने दावा किया कि उसका लक्ष्य ईरान के खतरनाक और तेज़ी से आगे बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को रोकना था. इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल हमलों की शुरुआत कर दी जिससे दोनों देशों के बीच सीधा युद्ध शुरू हो गया. इस लड़ाई में तब और तेजी आई जब 22 जून को खुलकर अमेरिका मैदान में उतर आया. अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को बंकर बस्टर बमों से निशाना बनाया. जवाब में ईरान ने कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे अल उदीद एयरबेस पर मिसाइल हमले कर दिए. इस हमले के बाद कतर में इमरजेंसी जैसे हालात बन गए थे.
जिसके बाद यह दावा किया गया कि युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से संपर्क साधा. उन्होंने कतर से अनुरोध किया कि वह ईरान से बातचीत करके उसे युद्ध विराम के लिए तैयार करें. कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने इस पहल को आगे बढ़ाया. वे सीधे तेहरान पहुंचे और वहां ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई से बातचीत की. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कतर ने ईरान को यह विश्वास दिलाया कि इजरायल युद्धविराम के लिए तैयार है और ईरान यदि युद्ध से पीछे हटता है तो इस संघर्ष को यहीं समाप्त किया जा सकता है.
कतर की मध्यस्थता रंग लाई और ईरान ने युद्धविराम की शर्तों को स्वीकार कर लिया. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की है कि कतर की पहल पर ईरान सीजफायर के लिए राजी हुआ है. तो यह साफ है कि सीजफायर का ऐलान भले ही ट्रंप ने किया है लेकिन ईरान और इजरायल की लड़ाई रोकने में अहम भूमिका कतर की है. अरब देश कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने ही अमेरिका की ओर से प्रस्तावित युद्धविराम के लिए ईरान को मनाया है.
उधर अब जबकि युद्धविराम की घोषणा हो चुकी है तो कूटनीतिक हलकों में इसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच सीधी टकराव की स्थिति को भी नाकारा नहीं जा सकता…फिलहाल ईरान और इजरायल की ओर से युद्ध विराम का पालन हो रहा है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर विवाद सुलझ नहीं जाते तब तक इस संघर्ष की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं होंगी. हालांकि कतर की इस भूमिका ने यह जरूर दिखाया है कि कूटनीति और संवाद से भी युद्ध जैसे हालात को टाला जा सकता है.