Bihar assembly polls : बिहार में विधानसभा चुनाव होने में कुछ ही महीने बाकी हैं. लेकिन ये महीने बिहार में एनडीए के सही से नहीं गुजर रहे. एक तरफ जहां राज्य में अपराध अपना रंग दिखा रहा है तो दूसरी तरफ सरकार के सहयोगी ही उन पर हमले कर रहे हैं. खासकर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की आलोचना में मुखर रहे हैं।
गया में अस्पताल ले जाते समय एम्बुलेंस के अंदर एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद पासवान ने कहा कि उन्हें ऐसी सरकार का समर्थन करते हुए दुख हो रहा है जो राज्य में बढ़ते अपराध को रोकने में विफल रही है। बिना लाग लपेट के चिराग ने कहा कि बिहार में जिस तरह से अपराध हो रहा है, प्रशासन पूरी तरह से अपराधियों के सामने नतमस्तक हो गया है। लोजपा नेता ने आरोप लगाया कि या तो प्रशासन इसके साथ मिलीभगत कर रहा है या प्रशासन पूरी तरह से बेकार हो गया है…मुझे शर्म आती है कि मैं ऐसी सरकार का समर्थन कर रहा हूं, जिसके शासन में अपराध नियंत्रण से बाहर हो गया है।
2020 के बिहार विधानसभा में खुले तौर पर नीतीश कुमार से बगावत करने वाले चिराग पासवान 2025 के चुनाव में भी उसी पैटर्न पर चलते दिख रहे हैं. हालांकि ये वही चिराग पासवान हैं जिन्होंने यह दावा किया था कि बिहार में मुख्यमंत्री पद की कोई भी खाली जगह नहीं है. छोटे बड़े मंचों से कई बार चिराग यह स्वीकार चुके हैं कि बिहार चुनाव में उनकी पार्टी नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन के साथ ही चुनावी मैदान में उतरेगी.लेकिन इन सब के बाद भी चिराग पासवान का खुले तौर पर नीतीश कुमार की सुशासन वाली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले रखना कुछ और भी संकेत कर रहा है. खासकर चिराग पासवान की राजनीति को लेकर.जिसे समझना बहुत जरूरी है खास कर बिहार की मौजूदा राजनीति को समझने के लिए…
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के हाजीपुर से सांसद चिराग पासवान केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री है.लोकसभा चुनाव 2024 में उनकी पार्टी ने बिहार के 30 सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी सीटों पर फतह हासिल की, जिसका नतीजा हुआ की ना सिर्फ राजनीति में चिराग पासवान का कद बड़ा हुआ बल्कि नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री भी बनाए गए…लेकिन चिराग ने बिहार की राजनीति में अपने महत्वाकांक्षा को पनपते देखा और अपनी गाड़ी मोड़ दी. बिहार के बेहतर भविष्य की वकालत करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि मेरा बिहार मुझे बुला रहा है…और तब से उनकी मौजूदा राजनीतिक गतिविधियां और रणनीति मुख्य रूप से बिहार की राजनीति पर केंद्रित हैं, विशेषकर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर।
चिराग ने केंद्र की मोदी सरकार को अपनी बातों से कई बार अपनी महत्वाकांक्षा को लेकर संकेत देने की कोशिश भी की है.बड़े मंचों पर चिराग पासवान का यह कहना कि वे बिहार के विकास के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहते हैं और दिल्ली की तुलना में बिहार में ज्यादा रुचि रखते हैं, ये वहीं संकेत है जिसके राजनीतिक मायने बड़े हैं. खासकर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर. हालांकि यह अधिकारिक नहीं है लेकिन मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 2025 के विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर प्रभावी भूमिका निभाने की योजना बना रही है।
लेकिन हैरान करने वाली बात है कि चिराग यह भी दावा कर रहें है कि वे एनडीए गठबंधन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे और उनकी रणनीति में अपने वोटरों को एनडीए सहयोगियों को ट्रांसफर करने को भी प्राथमिकता दी जा रही है। जिसके तहत बीते दिनों 8 जून 2025 शाहाबाद क्षेत्र में अपनी हालिया रैली ने उन्होंने सामाजिक न्याय और दलित-महादलित वोटों को साधने की कोशिश की।
लेकिन राजनीति इतना सीधा और सरल कहां होता है.चिराग पासवान की जो मौजूदा राजनीतिक चालें है उसको देखकर तो यही लग रहा कि चिराग बिहार में मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षा रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का भी यही मानना है और तो और उनके बहनोई और सांसद अरुण भारती ने भी उनकी मुख्यमंत्री उम्मीदवारी की वकालत की है। हालांकि चिराग ने इस बारे में स्पष्ट घोषणा नहीं की है लेकिन मीडिया द्वारा जब सवाल किए गए तो उन्होंने मना भी नहीं किया है…
बता दें कि चिराग पासवान अपने पिता रामविलास पासवान की सियासी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वे दलित और महादलित समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं जो बिहार की लगभग 5-6% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। जानकारों का मानना है कि राज्य की राजनीति और सामाजिक समीकरण के हिसाब से चिराग के महत्वाकांक्षा की पूर्ति आसानी से होती नहीं दिखती है. इसलिए उन्हें अभी कंघे की जरूरत है और अपनी इस जरूरत की पूर्ति करने के लिए एनडीए गठबंधन के साथ होना सुरक्षित समझा है.हालांकि गठबंधन में उनकी वफादारी को लेकर अटकलें भी होती रहती है. लेकिन उन्होंने बार-बार गठबंधन के प्रति अपनी वफादारी जताई है।
2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने बिहार में पांच सीटें जीतीं,जिसके बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली.हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए से अलग होकर जदयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे,जिससे नीतीश कुमार की पार्टी को नुकसान हुआ था। इस इतिहास के कारण कुछ लोग उनकी मौजूदा रणनीति को एनडीए के भीतर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखते हैं। लेकिन हाल के बयानों में एक तरफ जहां चिराग ने नीतीश कुमार की अगुवाई में चुनाव लड़ने में कोई आपत्ति न होने की बात कही है,लेकिन उनके दूसरे बयानों से यह भी संकेत मिलता है कि वो कुछ और भी चाहते है…