Bihar Elections : तेजस्वी यादव या चुनाव आयोग…फैक्ट चेक में कौन पास कौन फेल ?

Bihar Voter List Controversy : बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया कि हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा किया गया SIR के बाद जारी वोटर लिस्ट से उनका नाम गायब है. गायब होने का यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। इस मुद्दे पर तेजस्वी ने शनिवार को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की,जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनकी नामांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी की है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) ने उनका सत्यापन किया था, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम को मतदाता सूची से हटा दिया गया है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव आयोग के अधिकारी उनकी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के बावजूद उन्हें किसी प्रकार का स्पष्टीकरण नहीं दे रहे हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने वोटर आईडी कार्ड का भी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन किया और EPIC (Electoral Photo Identity Card) नंबर की जांच की, जिसमें यह संदेश सामने आया NO RECORDS FOUND (कोई रिकॉर्ड नहीं मिला)। तेजस्वी यादव ने इसके बाद चुनाव आयोग से सवाल उठाए कि जब उनका नाम सूची में नहीं है, तो वे आगामी चुनावों में कैसे भाग लेंगे?

इस पर पटना के जिला अधिकारी (DM) एस. एन. त्यागराजन ने तेजस्वी यादव के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने साफ किया कि तेजस्वी यादव का नाम वोटर लिस्ट में है और वह उस बूथ पर ही दर्ज हैं जहां वे पहले वोट डालते थे। पटना जिले के चुनाव अधिकारियों ने यह पुष्टि की कि तेजस्वी यादव का नाम दीघा विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या-204 में क्रमांक 416 पर मौजूद है, जो 2020 के विधानसभा चुनाव में भी था।

बता दें कि तेजस्वी ने जो वोटर आईडी कार्ड दिखाया था, उसका EPIC नंबर RAB2916120 था, जबकि चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई वोटर लिस्ट में जो EPIC नंबर मिला, वह RAB0456228 था। तेजस्वी ने इसे लेकर भी चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए और कहा कि अगर उनका EPIC नंबर बदल सकता है, तो यह चुनावी प्रक्रिया में व्यापक धांधली का संकेत हो सकता है। उनका आरोप था कि यह साजिश है, जिससे वोटरों के नाम कटवाए जा रहे हैं, विशेषकर उन लोगों के, जिनका नाम सूची में नहीं है।

DM ने कहा कि कोई भ्रम नहीं है और तेजस्वी यादव का नाम सही स्थान पर दर्ज किया गया है। उनका कहना था कि मतदान केंद्र संख्या 204 के EPIC नंबर की जांच करने पर उनका नाम पाया गया, जो उसी EPIC नंबर से मेल खाता है, जो चुनाव आयोग के पास है.पटना के DM ने यह भी बताया कि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को प्रारूप मतदाता सूची उपलब्ध कराई थी और सभी राजनीतिक दलों ने इस पर आपत्ति नहीं जताई थी।

फिलहाल तो पटना के DM और चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव के आरोपों का खंडन किया है, लेकिन यह मुद्दा चुनावी निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिहाज से अहम बन चुका है। आगे की जांच और चुनावी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी वोटर अपने अधिकार से वंचित न हो। तेजस्वी यादव का यह मामला बिहार के चुनावी माहौल में एक नया मोड़ है और यह भविष्य में चुनाव आयोग और अन्य राजनीतिक दलों के बीच मतदाता सूची के सत्यापन को लेकर नई बहस की शुरुआत हो सकती है।

हालांकि तेजस्वी यादव  के दावों पर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण ने एक और विवाद को जन्म दिया है. सवाल यह है कि तेजस्वी यादव जिस EPIC नंबर के साथ वोटर लिस्ट से अपना नाम हटाने का दावा कर रहे है वो गलत है या फिर चुनाव आयोग जिस EPIC नंबर  के साथ वोटर लिस्ट में उनका नाम होने का प्रमाण दे रहा है वो गलत है.  यह भी सच है कि तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस EPIC नंबर का हवाला दिया, उस नंबर के साथ उनका नाम बिहार के ड्राफ्ट वोटर रोल में मौजूद नहीं था। सवाल यह उठता है कि उनका EPIC नंबर कैसे बदल गया और क्यों? क्या मतदाता सूची में  एक मतदाता के दो-दो EPIC नंबर  हो सकते हैं ?  पटना के DM साहब का कहना है कि तेजस्वी यादव ने 2020 के बिहार चुनाव में इसी EPIC नंबर के साथ एफिडेविट दाखिल किया था। ऐसे में चुनाव आयोग को इस EPIC नंबर के साथ तेजस्वी का पिछला चुनावी हलफनामा भी जारी करना चाहिए था। लेकिन यह हलफनामा अब तक जारी नहीं किया गया.अगर यह मान भी लिया जाए कि तेजस्वी यादव के पास दो अलग-अलग EPIC नंबर वाले वोटर आईडी कार्ड थे, तो सवाल यह उठता है कि चुनाव आयोग ने एक को हटाकर दूसरे को क्यों स्वीकार किया?

आयोग के मुताबिक बिहार में 7 लाख लोगों के नाम डुप्लीकेसी और अन्य गड़बड़ियों के कारण हटाए गए हैं। लेकिन आयोग इन 7 लाख लोगों के EPIC नंबर और अन्य विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा है? बिहार में मतदाताओं के नाम हटाने के बाद चुनाव आयोग को मृतक और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची भी सार्वजनिक करनी चाहिए। ताकी ऐसे मतदाताओं के EPIC नंबर और उनके नाम-पते के साथ इस जानकारी का सार्वजनिक रूप से खुलासा हो सके. नहीं तो  मतदाता सूची को लेकर तेजस्वी यादव या चुनाव आयोग द्वारा किए गए  फैक्ट चेक में कौन पास कौन फेल हुआ इसका सही जवाब कहां खोजा जाए….

चुनाव आयोग ने बिहार में हुए गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान कुल 65 लाख से अधिक वोटरों के नाम काटे हैं। आयोग के अनुसार, 22 लाख से ज्यादा वोटरों का निधन हो चुका था, जबकि 36 लाख से ज्यादा वोटर स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो चुके थे। इसके अतिरिक्त, 7 लाख एक हजार वोटरों के नाम डुप्लीकेट पाई जाने के कारण हटा दिए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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