Bihar assembly elections : वोटर अधिकार यात्रा के जरिए बिहार में अपना पैर जमा पाएगी कांग्रेस…?

Bihar Voter Adhikar Yatra : लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शनिवार को बिहार के सासाराम से “वोटर अधिकार यात्रा” की शुरुआत करने जा रहे हैं। कांग्रेस की इस यात्रा में महागठबंधन के दूसरे सहयोगी दल भी शामिल हो रहे हैं. राहुल गांधी के साथ राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव साथ साथ चलेंगे. विपक्ष अपनी इस यात्रा को बिहार में हाल ही में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और “वोट चोरी” के खिलाफ एक बड़े जनआंदोलन के रूप में दिखा रहा है। 1,300 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर 23 से अधिक जिलों से गुजरने वाली यह यात्रा 16 दिनों तक चलेगी जिसका समापन 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक विशाल रैली के साथ होगा।

यह यात्रा विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम कटने के मामलों के खिलाफ विपक्ष की ओर से खड़ा किया गया प्रतिरोध है। राजद -कांग्रेस समेत सभी सहयोगी विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की देखरेख में मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या दलित, पिछड़े, आदिवासी, वंचित और अल्पसंख्यक समुदायों की है। राहुल गांधी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वे मिलकर मताधिकार छीनने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, यात्रा 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई। यह औरंगाबाद के देव, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, सुपौल, दरभंगा, सीतामढ़ी, बेतिया, छपरा जैसे प्रमुख जिलों से गुजरेगी। 20, 25 और 31 अगस्त को यात्रा विश्राम करेगी। जिसके बाद 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित होगी,इस रैली को विपक्षी एकता का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।

इससे पहले इस यात्रा में कांग्रेस के साथ महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) के अन्य दल भी शामिल हैं। राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, वामदलों के प्रतिनिधि और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) समेत विपक्षी दलों के नेता राहुल गांधी के साथ मंच साझा करेंगे। कांग्रेस प्रवक्ता और मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा कि SIR प्रक्रिया सिर्फ़ तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि मताधिकार छीनने की “सुनियोजित साजिश” है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ वोट का सवाल नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और पहचान पर हमला है।

उधर चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है जिस पर आखिरी सुनवाई 14 अगस्त को हुई थी, सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वह 19 अगस्त की शाम तक बिहार में हटाए गए वोटरों की जिला-वार और बूथ-वार सूची सार्वजनिक करे। अदालत ने आयोग को यह भी निर्देश दिया कि वह आपत्तियां स्वीकार करे और आधार या EPIC जैसे पहचान पत्रों को मान्य प्रमाण माने। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी। हालांकि चुनाव आयोग ने कांग्रेस और विपक्षी दलों के आरोपों से इनकार किया। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए ही यह प्रक्रिया चल रही है और अगर समय रहते आपत्तियां दर्ज कराई जातीं तो सुधार संभव था।

इधर वोटर अधिकार यात्रा को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वोटर अधिकार यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव और आगे फिर 2029 लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार करने की कोशिश है। कांग्रेस इसे जनाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है. 1 सितंबर को पटना की रैली इस पूरे आंदोलन की अंतिम परीक्षा होगी, जहां राहुल गांधी और विपक्षी दल यह दिखाने की कोशिश करेंगे कि SIR प्रक्रिया के खिलाफ जनता उनके साथ खड़ी है।

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